दतिया9 घंटे पहले
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श्रद्धा और विवेक के साथ किया धर्म सच्चा है। जैन आगम कर्म प्रधान है। अशुभ कर्मों का अशुभ फल मिलता है। शुभ कर्मों का शुभ फल होता है। कर्म दिखाई नहीं देते लेकिन उनका फल स्पष्ट दिखाई देता है। मनुष्य को चाहिए परिणामों की निर्मलता बनाए रखें। त्याग धर्म आत्मा से जोड़ता है और अनात्मा से मुक्त करता है। त्याग एक ऐसा रसायन है जिससे आत्मा चिपके कर्म निष्कासित होते हैं और आत्मा का भारीपन दूर हो जाता है। कर्मों के भार से रहित होकर आत्मा ही परमात्मा बनकर गमन करती है। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने बुधवार को सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सागर सभागृह में संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि आत्मा से परमात्मा बनाने का कार्य भोगी नहीं बल्कि योगी ही कर सकता है। व्यक्ति के जीवन में त्याग का विशेष महत्व है। वृक्ष फल का त्याग करते हैं, व्यक्ति यात्रा करने के लिए पैसे का त्याग करता है तभी उसकी यात्रा पूरी
होती है। बिना त्याग के व्यक्ति का जीवन असंभव है। वस्तु के जीवन में त्याग आने से लोभ, लालच और संग्रह का अभाव होता है। त्याग की बात संत, साधु बताते हैं और आत्मा को परमात्मा बनाते हैं। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में दो चीजें बड़ी महत्वपूर्ण हो गई हैं। एक मोबाइल और दूसरी स्माइल। उन्होंने कहा कि मेरा ये मानना है कि आदमी के हाथ में मोबाइल हो न हो पर चेहरे पर स्माइल हर हाल में होनी चाहिए, क्योंकि आदमी मोबाइल से नहीं, बल्कि स्माइल से स्मार्ट बनता है। सुखी जीवन का एक ही फार्मूला है जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। कल हमने जो भी पुरुषार्थ किया था, वह भाग्य स्वरूप आज प्राप्त है। जो पुरुषार्थ आज करेंगे, वह कल प्राप्त होगा, इसीलिए हमें पुरुषार्थ करना चाहिए। बच्चों को पूरी मेहनत से
पढ़ना चाहिए, क्योंकि पुरुषार्थ ही अच्छे अंक दिलाता है। तनाव से मुक्त होकर परीक्षा दें। मुनिश्री ने कहा कि हमें वह शिक्षा प्राप्त करनी है, जिसमें संस्कार भी हों। भारतीय संस्कृति का संरक्षण हो, धर्म की सुरक्षा हो, संस्कारों से ही संस्कृति जीवित रहेगी।चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि धर्म सभा के पहले समाजजनों ने आचार्यश्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र का आवरण कर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज से मंगल आशीर्वाद लिया! धर्मसभा का शुभारंभ आचार्यश्री पुष्पदंत सागर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। मुनिश्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में आयोजित किए जाएंगे।