Bapu’s Khadi now in Modern Variety, increased demand in 5 years; Now Khadi’s craze is growing not only among politicians but politicians but also among the fashion crazy youth | बापू की खादी अब मॉर्डन वैराइटी में, 5 साल में बढ़ी डिमांड; अब सिर्फ राजनेता-नेता ही नहीं बल्कि फैशन के दीवाने युवाओं में भी बढ़ रहा खादी का क्रेज

Bapu’s Khadi now in Modern Variety, increased demand in 5 years; Now Khadi’s craze is growing not only among politicians but politicians but also among the fashion crazy youth | बापू की खादी अब मॉर्डन वैराइटी में, 5 साल में बढ़ी डिमांड; अब सिर्फ राजनेता-नेता ही नहीं बल्कि फैशन के दीवाने युवाओं में भी बढ़ रहा खादी का क्रेज


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मुरैना21 घंटे पहले

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ग्रामोद्योग केंद्र पर खादी के कपड़े खरीदते ग्राहक।

आज गांधी जयंती है। विश्वभर में बापू के अहिंसा के सिद्धांतों को प्रचारित करने वाले सुब्बाराव जी की कर्मस्थली मुरैना में खादी का ट्रेंड बढ़ रहा है। खाद की मॉर्डन वैराइटी जबसे दुकानों पर मिलने लगी है, तबसे राजनेता-नेता ही नहीं बल्कि युवाओं में इसका क्रेज बढ़ा है। इसका आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि 5 साल पहले जहां खादी ग्रामोद्योग भंडार से जहां 25 से 35 लाख का सालाना खादी बिकती थी, वह अब बढ़कर 95 लाख तक पहुंच गई है। कुल मिलाकर खादी की डिमांड ढाई गुना तक बढ़ी है।

वहीं खादी की डिमांड 5 साल में ढाई गुना तक बढ़ी है। 5 साल पहले तक जब खादी का सादा कपड़ा बाजार में उपलब्ध होता था, तब तक सिर्फ 35 लाख रुपए सालाना बिक्री खादी ग्रामोद्योग भंडार पर होती थी। लेकिन पांच साल में यह कारोबार 35 लाख से बढ़कर 95 लाख तक पहुंच गया। इसके पीछे वजह से मुरैना में यूथ पॉलिटिक्स का बढ़ता ट्रेंड वहीं खादी की मॉर्डन वैराइटियां युवाओं को खूब भा रही हैं। मुरैना में मिल रही वैराइटियां गुजरात के बाद दिल्ली में ही उपलब्ध हैं।

शिक्षकों को खादी अपनाने देंगे प्रोत्साहन
गांधी जयंती पर प्रांतीय शिक्षक संघ पर अनोखी पहल शुरू कर रहा है। संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष मुनेश सिंह सिकरवार ने बताया कि गांधी जयंती पर बापू को श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ ही अपने संगठन से जुड़े शिक्षकों को खादी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा संगठन से जुड़े शिक्षकों से वन-टू-वन चर्चा भी की जाएगी।

गुजरात से आ रही खादी की मॉर्डन वैराइटी
खादी ग्रामोद्योग भंडार पर खादी ग्रामोद्योग भंडार का काम देख रहे कमल बताते हैं कि पहले सादा खादी आती थी, जिसे राजनेता-नेता व बुजुर्गजन ही इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब गुजरात ग्रामोद्योग केंद्र से खादी की कई वैराइटियां आ रही हैं। पहले जहां कूर्ता-पायजामा व शर्ट का कपड़ा आता था। वहीं अब पैट के लिए भी कपड़े की कई वैरायटियां मार्केट में हैं। जिसकी खूब डिमांड है। वहीं रेडीमेड मार्केट भी काफी जोर पकड़ रही है। खादी की प्लेन व अन्य वैराइटियों के कपड़ों से तैयार रेडीमेड शर्ट का ट्रेंड भी युवाओं के बीच खूब है।



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