Purchase of millet, instead of mandi, to be torn, farmers lose Rs 800 per quintal | बाजरा की खरीद मंडी के बजाए फड़ाें पर, किसानाें काे प्रति क्विंटल पर 800 रुपए का हो रहा नुकसान

Purchase of millet, instead of mandi, to be torn, farmers lose Rs 800 per quintal | बाजरा की खरीद मंडी के बजाए फड़ाें पर, किसानाें काे प्रति क्विंटल पर 800 रुपए का हो रहा नुकसान


मुरैना19 घंटे पहले

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मुरैना गांव के पास एमएस रोड पर बाजरा की खरीद करता व्यापारी।

  • 5 जून से लागू किए मॉडल एक्ट का असर अब कृषि उपज मंडी समितियों की आय पर दिखाई देने लगा

मॉडल एक्ट लागू होते ही व्यापारियों ने बाजरा व सरसों की खरीद के लिए शहर की प्रवेश सीमाओं पर अपने तौल कांटे लगा दिए हैं। इसका असर किसान और मडी कर्मचारियों पर पड़ रहा है। किसानों को प्रति क्विंटल 800 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। मंडी की आवक भी घट गई है। राजस्व 50 फीसदी कम होने से कर्मचारियों के समक्ष वेतन संकट के हालात बन रहे हैं।

नए कानून ने गल्ला व्यापारियों को छूट दी है कि वह कृषि उपज मंडी परिसर से बाहर जाकर कहीं भी गेहूं, सरसों, धान, दलहन व तिलहन की खरीद कर सकते हैं। खरीदी गई जिंस पर उन्हें कोई टैक्स देने की जरूरत नहीं है। मॉडल एक्ट से मिली सहूलियतों का लाभ उठाने के लिए गल्ला व्यापारियों ने जौरा रोड, नूराबाद रोड, सरायछोला रोड व मुडियाखेरा रोड पर अपने-अपने दलालों को कांटे लेकर फड़ पर बैठा दिया है। दैनिक भास्कर की टीम ने शनिवार को एमएस रोड पर पेट्रोल पंप के पास अनिल गौड़ को किसानों से बाजरा की खरीद करते हुए पाया।

इस युवक से जब उसके लाइसेंस के बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि वह तो 2-4 बोरी जिंस खरीद रहा है। इसलिए वह बिना लाइसेंस काम कर रहा है। भास्कर टीम ने जब गल्ला व्यवसायी से यह पूछा कि मौके पर बाजरा से भरे 50 बोरे रखे हैं और 70 से अधिक बोरे उसकी दुकान में रखे दिखाई दे रहे हैं तो उसका काराबोर छोटा कैसे हुआ। यह बात सुनकर अनिल के पास कोई जबाव नहीं था। इससे जाहिर हुआ कि मंडी टैक्स की चोरी के लिए गल्ला व्यापारियों ने मंडी परिसर से बाहर बाजरा व सरसों की खरीद तेज कर दी है। यहां बता दें कि ऐसे खरीद केन्द्र शहर में 10 से 12 स्थानाें पर संचालित हैं।

जानिए… किसानों को कैसे हो रहा नुकसान
इस समय बिकने के लिए शहर में बाजरा बड़े पैमाने पर आ रहा है। सरकार ने बाजरा के सरकारी रेट 2150 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किए हैं लेकिन खरीद के लिए अभी एक भी केन्द्र शुरू नहीं किया है। किसानों को फसल कटने के बाद पैसे की जरूरत है। वहीं इस हाल में किसान बाजरा को बेचने शहर में आ रहे हैं तो व्यापारियों के दलाल उनकी जिंस को शहर के प्रवेश द्वार पर 1400 रुपए के रेट से खरीद रहे हैं। इससे किसान काे एक क्विंटल पर 750 रुपए का घाटा हो रहा है। वहीं घाटे को यूं भी समझ सकते हैं कि गल्ला मंडी में किसान जब अपनी जिंस बेचने के लिए आता है तो उसकी ट्रॉली की जिंस की नीलाम बोली लगाने के लिए 20 से 25 गल्ला व्यापारी उपस्थित होते हैं। नीलाम बोली में किसान की फसल को कंप्टीशन में अच्छे रेट मिल जाते हैं।

मॉडल एक्ट का जिंस की आवक पर असर
मॉडल एक्ट ने गल्ला मंडी में आने वाली जिंस की आवक को भी प्रभावित किया है। अगस्त 2019 में मुरैना मंडी में 38 हजार 242 क्विंटल जिंस खरीदी गई थी। अगस्त 2020 में महज 33 हजार 81 क्विंटल जिंस की खरीद हुई। सितंबर 2019 में 33 हजार 52 क्विंटल बाजरा, गेहूं व सरसों आदि खरीदा गया और सितंबर 2020 में 20 हजार 583 क्विंटल खरीद हो सकी क्योंकि किसानों की फसल को व्यापारी व उनके दलाल शहर के बाहर से खरीद रहे हैं। इससे कृषि उपज मंडी समिति को राजस्व हानि हो रही है।

9000 परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट
नए कानून के क्रियान्वयन से प्रदेश की गल्ला मंडियां जल्द बंद हो जाएंगी और 9000 अधिकारी-कर्मचारियों के परिवार के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा होगा। मंडी कर्मचारियों की मांग है कि मॉडल एक्ट को लागू कराने के साथ ही मंडी कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, सुनिश्चित किए जाएं।
रामबिलास गुर्जर, जिला अध्यक्ष कृषि उपज मंडी कर्मचारी संघ

बड़ी कंपनियों के मुनाफे का एक्ट
मॉडल एक्ट, विदेशी सोच की उपज है। इससे किसानों की फसल को बड़ी कंपनियां औने-पौने भाव में खरीदेंगी। नए कानून से किसानों की आय घटेगी। इसका हम लगातार विरोध कर रहे हैं।
रामनिवास शर्मा, किसान नेता मुरैना



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