Mulberry trees planted in the fields, silkworms are reared, the villagers are inspired by the advanced farming in many ways | खेतों में लगाए शहतूत के पेड़, पाल रहे रेशम के कीड़े, कई तरीकाें से उन्नत किसानी कर ग्रामीणाें काे कर रहे प्रेरित

Mulberry trees planted in the fields, silkworms are reared, the villagers are inspired by the advanced farming in many ways | खेतों में लगाए शहतूत के पेड़, पाल रहे रेशम के कीड़े, कई तरीकाें से उन्नत किसानी कर ग्रामीणाें काे कर रहे प्रेरित


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साेमलवाड़ा खुर्द18 घंटे पहले

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शरद वर्मा, उन्नत किसान, साेमलवाड़ा

(नवनीत काेह). शहर से 8 किमी दूर सोमलवाड़ा खुर्द के उन्नत किसान शरद वर्मा रेशम की खेती कर अलग पहचान बना रहे हैं। शरद ने नवाचार से अपने गांव की सूरत ताे बदली ही अपनी पत्नी कंचन वर्मा काे भी नए तरीकाें से किसानी और गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए प्रेरित किया। इसी का परिणाम है कि दंपती ने जिले काे कृषि कर्मण अवाॅर्ड दिलाया।

शरद पिछले 5 सालाें से रेशम उत्पादन कर ग्रामीणाें काे भी प्रेरित कर रहे हैं। उन्हाेंने अपने खेत में रेशम कीट के लिए शेड बनाया है। करीब 3 एकड़ खेताें में शहतूत के पेड़ लगाए हैं। रेशम की कीट शहतूत के पत्ताें के ऊपर रहते हैं, जाे 30-40 दिन में बड़े हो जाते हैं। रेशम कीटाें की लार से ककून बनता है। सूखकर रेशम का धागा बन जाता है।

काम में नवाचार जरूरी है

एलएलबी करने के बाद पिता अशोक वर्मा के साथ खेती में हाथ बंटाया। सरकार की याेजनाऔओं और नवाचार काे समझकर नए तरीके से खेती करने की इच्छा हुई। 2010 के बाद खेती में नवाचार शुरू किए। अब ग्रामीणों को प्रेरित कर रहा हूं।
-शरद वर्मा, उन्नत किसान, साेमलवाड़ा

इन नवाचारों को ग्रामीण भी अपना रहे

1. अभी एक खेत में एक फसल की बोवनी नहीं करते। उनके मुताबिक एक ही फसल का उत्पादन करने से जमीन की उर्वरक क्षमता कम होती है। एक सीजन में अगर गेहूं की फसल उगाई है तो 2 साल तक उस खेत में गेहूं मक्का, धान या सब्जी उगाई जाती है।

2. ग्रामीणाें के साथ मिलकर शरद ने गांव के छोटे से नाले का गहरीकरण किया। अब गांव का जलस्तर बढ़ गया है। बारिश में इसमें काफी मात्रा में पानी एकत्र हुआ, जिसे किसानाें ने सिंचाई के लिए भी उपयाेग किया। शरद ने नाले से लगी हुई डेढ़ एकड़ भूमि में सब्जी लगाई हैं।

3. साेमलवाड़ा के किसान गांव में नरवाई नहीं जलाते। गांव के अधिकांश घराें में स्ट्राॅरेपर मशीन है। इससे भूसा बनाया जाता है। गांव में पिछले 10 वर्षों से कोई भी नरवाई में आग नहीं लगाता है। शरद इस समय मक्का की पराली से एक एकड़ में करीब 40 क्विंटल चारा बना रहे हैं।



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