In the MLA’s village, 6 villagers leave the slab of Patiya for 18 years | विधायक के गांव में 18 साल से पटिया की पुलिया से निकलते हैं 6 गांव के लोग

In the MLA’s village, 6 villagers leave the slab of Patiya for 18 years | विधायक के गांव में 18 साल से पटिया की पुलिया से निकलते हैं 6 गांव के लोग


श्याेपुरएक दिन पहले

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  • 18 साल पहले सोंठवा निवासी प्रभूलाल नायत ने खुद डेढ़ लाख खर्च कर बनवाई थी पुलिया

नदी में पिलर खड़े कर महज तीन फीट चौड़ी पत्थर की पटिया पर रखकर बनी यह काम चलाऊ पुलिया श्याेपुर क्षेत्र से विधायक बाबू जंडैल मीणा के गांव की है। रोजाना इस पुलिया पर अपनी जान हथेली पर रखकर 6 गांव के लोग गुजरते हैं।

ग्रामीणाें का यह जोखिम भरा सफर पिछले 18 साल से अनवरत जारी है। नदी पार इलाके में बसी करीब 20 हजार आबादी काे निकलने में आने वाली परेशानी काे देखते हुए दुआर नदी पर पुल बनाने की क्षेत्रवासियाें की मांग 40 साल पुरानी है। जब सरकार ने नहींं सुनी ताे लोगों की सुविधा के लिए सोंठवा गांव के एक किसान ने निजी खर्च पर पुलिया बनवाने की कामचलाऊ व्यवस्था की थी। लंबे इंतजार के बाद अब दुआर नदी की कामचलाऊ पुलिया पर खतरे भरा सफर करने की मजबूरी से क्षेत्रवासियाें काे निजात मिलने वाली है।

शासन द्वारा लाेक निर्माण विभाग काे रन्नाैद से साेंठवा तक सड़क के साथ दुवार नदी पर नई पुलिया बनाने के लिए 4 कराेड़ रुपए की राशि मंजूर कर दी है। विधायक बाबू जंडैल सिंह मीणा ने इस संबंध में मंगलवार काे कहा कि सड़क के साथ दुआर नदी पर पुलिया का निर्माण कार्य जल्द शुरू हाेने वाला है।

दरअसल श्योपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत सोंठवा के दलारना, बिलपुर, जोड़ा खेड़ली, कीरपुरा, जारेला और सरदार का टपरा गांव दुआर नदी के उस पार बसे हुए हैं। पहले अपने खेत और प्रेमसर की ओर जाने के लिए लोगों को तैरकर और मटकी के सहारे नदी में पार करनी पड़ती थी। इस समस्या पर सरकार ने गौर नहींं किया तो सोंठवा गांव के एक किसान ने खुद ही पुलिया बनवाने का बीड़ा उठाते हुए 2002 में काम शुरू कराया था।

लेकिन दुर्भाग्य से कुछ दिन बाद ही उनके पिता बीमार पड़ गए, इस वजह से काम नदी के बीच पिलर खड़े होने से आगे नहींं हो सका। पिता के इलाज में पैसा खर्च होने के कारण उन पिलर के ऊपर पत्थर की 3 फीट चौड़ी पटिया रखनी पड़ी थी। तभी से रोजाना सेकड़ों पैदल राहगीरों के अलावा लोग मोटरसाइकिल भी निकालते हैं।

पीडब्ल्यूडी की सड़क में शामिल कराया पुल

मेरे गांव में दुआर नदी के उस पार बसे 6 गांव के लाेगाें काे बरसाें पहले जन सहयोग से बनी कामचलाऊ फर्शी की पुलिया से गुजरना पड़ता है। इस पुलिया के पास पंचायत एक रपटा बना रही है। इस जगह पर अक्सर हादसे हाेते हैं। इसलिए रन्नाेद से साेंठवा मार्ग पर 4 कराेड़ रुपए की लागत से सड़क के साथ पुलिया निर्माण के लिए राशि मंजूरी हाे गई है। लाेक निर्माण विभाग द्वारा यह काम जल्द शुरू किया जाएगा।
-बाबू जंडेल सिंह मीणा, विधायक श्योपुर

मामूली चूक से लोग हो रहे हादसे का शिकार

पटिया से बाइक समेत नदी में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं कई लोग दुआर नदी पर पटिया की कामचलाऊ पुलिया पर राहगीरों के गिरकर घायल होने की घटनाएं कई बार हो चुकी है। चक्कर काटने से बचने के लिए ज्यादातर मोटरसाइकिल व साइकिल सवार लोग सकरी पुलिया से निकलने का जोखिम उठाते हैं। मोटरसाइकिल को पकड़कर पैदल चलते हुए इस पटिया पर निकलते समय एक एक कदम संभलकर चलना पड़ता है।

जरा सी चूक होने पर हादसा तय होता है। पिछले महीनों ग्राम बमोरी जाट निवासी देवीशंकर नायक पुलिया से बाइक समेत गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। इससे पूर्व कीरपुरा का प्रहलाद केवट और जारेला गांव का शंभूलाल बैरवा भी पटिया पर संतुलन बिगड़ने के कारण गिरकर जख्मी हो गए थे।

पुलिया निर्माण के दौरान प्रभुलाल के पिता की तबीयत हुई खराब, तभी से अधूरी है

छह गांव के लोगों की जब शासन ने सुनवाई नहींं की तो सोंठवा निवासी प्रभू लाल पुत्र रामनाथ नायक द्वारा वर्ष 2002 में खुद डेढ़ लाख रुपए खर्च कर सोंठवा के पास दुवार नदी पर पुलिया बनवाई थी। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया के निर्माण कार्य के दौरान ही उनके पिता रामनाथ नायक की तबियत खराब हो गई।

बीमारी के इलाज में पैसा खर्च होने की वजह से पुलिया का काम मुकम्मल नहींं हो सका था। इसके बाद लोगों के निकलने के लिए पिलर पर सिंगल पटिया बिछाकर लोगों के निकलने की व्यवस्था कर दी गई। तभी से यही सिंगल पटिया की पुलिया छह गांव के लोगों के आवागमन का सहारा है।

गांव से जाने के है दो रास्ते, शार्टकट में खतरा उठाओ या 5 किमी का फेरा लगाओ​​​​​​​

ग्राम दलारना, बिलपुर, जोड़ा खेड़ली, कीरपुरा, जारेला और सरदार का टपरा गांव में बसी करीब 20 हजार आबादी के लोगों को गांव से बाहर निकलने के दो रास्ते हैं। पहले शाॅर्टकट रास्ते में दुआर नदी पर 3 फीट चौड़ी पट्टी पर चलकर नदी पार करनी पड़ती है। जो लोग जिंदगी दांव पर लगाने से डरते हैं उन्हें दूसरे रास्ते से 5 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि नदी की सकरी पटिया से साइकिल और बाइक के अलावा अन्य वाहन नहींं निकल पाते हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली, कार आदि वाहन फेरा लगाकर खेतों और प्रेमसर की ओर आवागमन करते हैं।



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