High Court order violating constitutional rights; High court challenge the high court’s decision to ban election rallies | हाईकोर्ट का आदेश संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन; चुनावी रैलियों पर रोक के हाईकोर्ट के फैसले को बड़ी अदालत में चुनौती

High Court order violating constitutional rights; High court challenge the high court’s decision to ban election rallies | हाईकोर्ट का आदेश संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन; चुनावी रैलियों पर रोक के हाईकोर्ट के फैसले को बड़ी अदालत में चुनौती


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भोपाल15 मिनट पहले

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फाइल फोटो

  • तर्क… अनुच्छेद 329 के अनुसार नतीजे आने तक आयोग के काम में कोर्ट दखल नहीं कर सकता

मप्र के एक हिस्से में चुनावी रैली-सभाओं पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच द्वारा लगाई गई रोक को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश को संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन बताया है। इस अनुच्छेद के तहत आयोग को चुनाव की अधिसूचना जारी होने से नतीजे आने तक मिले विशेष अधिकारों का जिक्र है। आयोग ने अपनी याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट का आदेश आयोग के काम में हस्तक्षेप है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में दो अन्य याचिकाएं भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर और मुन्ना लाल गोयल ने लगाई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इन पर तत्काल सुनवाई की मांग की, लेकिन इन पर सुनवाई कब से हो, कोर्ट ये फैसला 26 अक्टूबर को लेगा।

चुनाव की याचिका की पुष्टि मप्र के ज्वाइंट सीईओ मोहित बुंदस ने की। याचिका में हाईकोर्ट के पैरा 14 में पारित आदेश को भी आयोग के कामों मे दखल बताया गया है, जिसमें कहा गया है कि अगर राजनीतिक पार्टी भौतिक रूप से सभा करना चाहती है, उसके लिए इजाजत लेते समय बताना होगा कि उस जगह वर्चुअल सभा क्यों नहीं हो सकती है। कलेक्टर को उनके आवेदन के बाद स्पीकिंग ऑर्डर पास करना होगा और सभा की अनुमति के लिए मामला चुनाव आयोग को भेजना होगा। इसके बाद राजनीतिक दल सभा कर पाएंगे।

आयोग की याचिका में ये मुद्दे भी उठाए
– हाईकोर्ट का आर्डर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए आदेश का उल्लंघन। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में पोन्नू स्वामी वर्सेस रिटर्निंग आफिसर, मोहिंदर सिंह विरुद्ध मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयोग विरुद्ध अशोक कुमार के मामले में चुनाव आयोग को आर्टिकल 329 बी में प्राप्त अधिकारों को स्पष्ट कर शक्तियां स्पष्ट की हैं। इन फैसलों में कहा गया है कि चुनाव संचालन के बीच में आयोग के कामों में कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा।- ग्वालियर हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को नहीं सुना और फैसला सुना दिया। यह प्राकृतिक न्याय के विपरीत है।

– राजनीतिक दलों को चुनावी सभाओं की अनुमति के लिए जमा होने वाली भीड़ के उपयोग के लिए मास्क और सैनिटाइजर खरीदी की दोगुनी राशि जमा करना होगी, जो गलत है। – ग्वालियर हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में आने वाले 9 जिलों ग्वालियर, गुना, मुरैना, भिंड, अशोकनगर, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर और विदिशा जिले के लिए जो आदेश पारित किया है उसमें कहा गया है कि राइट आफ हेल्थ ज्यादा जरूरी है लेकिन प्रत्याशियों को राइट टू कैंपेन का अधिकार भी प्राप्त है।

– प्रद्युम्न तोमर और मुन्नालाल गोयल की याचिका में भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में पारित आदेशों का हवाला दिया है। साथ ही कोर्ट के आर्डर को चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 329 में मिले अधिकारों का उल्लंघन बताया है।

यहां विरोधाभास : आयोग ने 21 अक्टूबर को राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और महासचिवों को दिए आदेश में कहा कि आयोग की 9 अक्टूबर को कोविड -19 के लिए जारी एडवाइजरी का राजनीतिक दलों की सभाओं और रैलियों में पालन नहीं किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सभाओं और रैलियों में कोविड गाइड लाइन का पालन कराए।

आयोग जनता के हित भूलकर सत्ताधारी पार्टी के हितों के साथ
विश्व में पहली बार एक चुनाव आयोग हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहा है, जहां हाईकोर्ट ने आयोग को कोविड संक्रमण को रोकने का अधिकार आयोग को दिया। आप जनता का हित भूलकर सत्ताधारी पार्टी के हितों का साथ दे रहे हैं।
– विवेक तन्खा, वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट



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