मुरैना17 घंटे पहले
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मिट्टी के दीपक बनाता कुम्हार।
- कुम्हार बोले- झालरों के कारण पिछले कुछ सालों से कम हुई दीपकों की मांग
रोशनी के पर्व दिवाली के लिए मिट्टी के दीपक बनाने का काम जोरों पर चल रहा है। इनका बड़ी संख्या में निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन इस साल मिट्टी के दीपकों की मांग कम है। इसलिए पिछले वर्षों की अपेक्षा इस साल कुम्हारों ने कम ही दीपक बनाए हैं। पारंपरिक व तरह-तरह की आकृति में बनाए गए यह आकर्षक दीपक लोगों को लुभा रहे हैं। दीपक बनाने के बाद कुम्हार इनका रंगरोगन सहित अन्य सजावट करने में जुटे हैं।
शनिवार को चाक पर मिट्टी के दीपक बना रहे महेश प्रजापति ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रिक झालरों के कारण मिट्टी के दीपकों की मांग कम हुई है। लेकिन आज भी घर-प्रतिश्ठान में माता लक्ष्मी के पूजन और छत-आंगन में श्रद्धालुओं द्वारा मिट्टी के दीपक हीर जलाए जा रहे हैं। इस कारण अब भी इन दीपकों की मांग बनी हुई है। दिवाली पर्व के कुछ ही दिन बचे हैं। इसलिए दीपकों का निर्माण तेजी से हो रहा है। इसको लेकर कुम्हारों की बस्ती में चहलपहल बनी हुई है।
वहीं इस साल दीपकों की मांग कम है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए लोग भी स्वदेशी अपनाने पर जोर दे रहे हैं। इसलिए चीन की अनी इलेक्ट्रोनिक झालर लोग कम ही खरीदेंगे। इससे कुम्हारों को भी बड़ी आस बंधी है। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में इन दिनों बैठने तक फुर्सत नहीं मिलती थी। लेकिन अब दीपकों की मांग कम होने के कारण हालात बदल गए। कुम्हारों को उम्मीद है कि चीनी सामान के उपयोग का विरोध होेने पर उनके पुराने दिन लौटेंगे।