कवि सम्पत सरल ने भाजपा और कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा;अमित शाह जी आटो लेकर कांग्रेस ऑफिस के सामने से निकल जाए तो 10-20 विधायक तो ऐसे ही तोड़ लें

कवि सम्पत सरल ने भाजपा और कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा;अमित शाह जी आटो लेकर कांग्रेस ऑफिस के सामने से निकल जाए तो 10-20 विधायक तो ऐसे ही तोड़ लें


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भोपालएक घंटा पहले

राजनीति पर हास्य के रंग बिखेरते कवि सम्पत सरल।

  • 8 महीने बाद पहली बार सजी कवियों की महफिल
  • देर रात तक ठंड के बावजूद जमे रहे श्रोता

रवींद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर लगभग 8 महीने बाद कविता की महफिल सजी। मौका था आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के 75वें अवतरण दिवस पर हुए कवि सम्मेलन का। देश के सुप्रसिद्ध कवियों सम्पत सरल, अरुण जैमिनी, पवन जैन और डॉ. रूचि चतुर्वेदी ने अपनी कविताओं में प्रेम, श्रृंगार, हास्य और राष्ट्रीयता के रंग भरे। ठंड के बावजूद श्रोतागढ़ अंत तक जमे रहे।

वीडियों में देखिए कवियों के रंग

भाजपा-कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए मुझे तो आजकल आप कह रहे हो तनाव है। मुझे बहुत हंसी आ रही है। पिछले दिनों एक नेता मिल गए थे सामने बैठे थे। मैं जानता नहीं था। मैंने कहा साहब कांग्रेस में हो क्या। बोले भाजपा में है कांग्रेस में घंटा भर पहले थे। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली भाजपा का आत्मविश्वास कितना गिर गया कि कांग्रेस के ऑफिस के सामने से अमित शाह निकल जाए तो 10-20 विधायक तोड़ लें। मजे कि बात देखों भाजपा जिस गैर भाजपाई कोमहाभ्रष्ट कहती है। वहीं गैरभाजपाई महाभ्रष्ट भाजपा ज्वॉइन कर ले तो तुरंत उज्जवल हो उठता है। यहीं प्रधानमंत्री की उज्जवला योजना है।

बंद थी दुकानें शहर था बंद, सन्नाटा भारी था

फिर भी हर नाजुक मौके पर पहुंचा वर्दीधारी था

लाेगों का परिवार बचाने घंटों गश्त लगाते थे

पर अपने परिवार की खातिर हफ्तो घर नहीं जाते थे।

यूं तो हमारे भी हजारों साथी इस महामारी की चपेट में पड़े थे

फिर भी हम वर्दीधारी वर्दी पहनकर अपने फर्ज पर अड़े थे

प्रेम तुलसी के दल सी सजी राधिका

हर निधिवन बसी कृष्ण की पांखुरी

एक ऊंगली पे गिरिराज को धर लिया

दस की दस ऊंगलियों से बजी बांसुरी

किसने बोला काम करो,

घर बैठो आराम करो,

बाहर काफी दर्दी है, गर्मी, बारिश सर्दी है

दो रोटी के चक्कर में तूने आफत कर दी है

दाम चढ़ेंगे चढ़ने दे, रोग बढ़ेंगे बढ़ने दे

तंत्र मलाई खाएगा, तू बस खुद को पढ़ने दे

मैंने राजनीति में सफल होने के लिए कुछ आसन तैयार किए हैं।

अगर राजनीति में सफल होना है तो मेरी राह चुनिए

और विशेष आसन स्वामी अरुण जैमिनी से सुनिए

पहला है सूर्य नमस्कार

ये अपने-अपने हाईकमान की ओर मुंह करके किया जाता है

इसे करने वाला एक दिन जरूर सफलता पाता

अगला आसन है रीढ़ विहीन आसन

अपने दोनों हाथ जोड़ियों, सामने वाले के आचरण इग्नोर करते हुए उसके चरणों तक मोड़िए

इसमें आपके घुटने टिक जाए तो टिक जाने दीजिए और स्वाभिमान बिकता है तो बिक जाने दीजिए।



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