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भोपाल5 घंटे पहले
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज केन-बेतवा लिंक परियाेजना को लेकर बैठक करेंगे। इसमें यूपी को पानी देने को लेकर अहम फैसला होगा।
- 15 साल से चल रहे विवाद को सुलझाएंगे केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
- दीपावली के बाद शेखावत करेंगे एमपी-यूपी के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक
मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के बीच केन-बेतवा लिंक परियोजना में जल बंटवारे का विवाद अब अंतिम चरण में है। मध्य प्रदेश इस परियोजना से 1700 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी उत्तर प्रदेश देने को तैयार है। जल संसाधन विभाग ने यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को इस पर फैसला लेंगे। 15 साल से चले आ रहे पानी बंटवारे के इस विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों से राय मांगी है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दीपावली के बाद किसी भी दिन दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक पानी की जरुरत के हिसाब से बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय करेंगे।
मध्य प्रदेश ने तैयार किया प्रस्ताव
मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा प्रस्ताव अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा है। जिसमें केन-बेतवा लिंक परियोजना से उत्तर प्रदेश को रबी के सीजन में 700 एमसीएम और खरीफ के सीजन में 1000 एमसीएम पानी देना प्रस्तावित है। दरअसल, दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर जारी विवाद के चलते यह परियोजना 15 साल से आकार नहीं ले पा रही है।
दोनों राज्यों में पानी की समस्या
वर्ष 2005 में मध्य प्रदेश और यूपी के बीच जल बंटवारा हो गया था, लेकिन बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने पानी की मांग बढ़ा थी। जिसके चलते विवाद हो गया। इसी वजह से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पीने के पानी और सिंचाई के पानी की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
विवाद से नाराज है केंद्र सरकार
पानी के बंटवारे को लेकर चल रहा विवाद सुलझ नहीं पाने से केंद्र सरकार नाराज है। क्याेंकि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। बावजूद इसके आपसी सहमति बनाने के कोई प्रयास नहीं किए गए। इसको लेकर पिछली बैठक में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने जल बंटवारे पर विवाद की वजह से परियोजना में देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने विवाद के समाधान के लिए दोनों ही राज्यों से अक्टूबर तक प्लान मांगा था। बीते 29 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित थी जो उपचुनावों के चलते स्थगित कर दी गई।
विवाद की जड़
वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए 547 एमसीएम और खरीफ फसल के लिए 1153 एमसीएम पानी देना तय हो गया था। लेकिन वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश की मांग पर रबी फसल के लिए 700 एमसीएम पानी देने पर सहमति बन गई थी। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को 788 एमसीएम पानी देना तय कर दिया था। लेकिन यूपी सरकार ने जुलाई 2019 में 930 एमसीएम पानी मांग लिया था। जिसे मध्य प्रदेश ने इंकार कर दिया था।
मध्य प्रदेश का तर्क
सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग ने पानी की जरूरत की योजना में साफ उल्लेख किया है कि रबी के सीजन में उत्तर प्रदेश को 700 एमसीएम और खरीफ में 1000 एमसीएम पानी ही दिया जा सकेगा। इससे ज्यादा पानी देने पर मध्य प्रदेश में 4.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की मुश्किलें आएंगी। विभाग का कहना है कि परियोजना में जंगल, जमीन और वन्यप्राणियों के लिए रहवास क्षेत्र का नुकसान मध्य प्रदेश को वहन करना है, ऐसे में पानी पर ज्यादा हक उसका है।