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इंदौर22 मिनट पहले
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मंदिर में एक सिंहासननुमा कुर्सी मिली है, जिसमें बाबा बैठा करते थे।
भाजपा और कांग्रेस दोनों शासन काल में राज्यमंत्री का दर्जा पा चुके नामदेव दास त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा के अवैध साम्राज्य पर जिला प्रशासन ने सोमवार को भी बुलडोजर चलाया। सुपर कॉरिडोर में किए गए अतिक्रमण को तोड़ने के बाद टीम ने अंबिकापुरी एक्सटेंशन स्थित मंदिर को उनके कब्जे से मुक्त करवाया। यहां पर बाबा के नाम से जमीन की रजिस्ट्री और बैंक पासबुक मिली है। बाबा के बैठने के लिए एक सिंहासन नुमा कुर्सी भी यहां रखी थी। बाबा के कब्जे से मुक्त हुए मंदिर में सोमवार को बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचे और पूजा अर्चना कर यहां के अतिक्रमण हटाए जाने पर प्रसन्नता जाहिर की।

आश्रम में एक रजिस्ट्री भी मिली है, जिसमें 10 लाख की खरीदी का जिक्र है।
8 एकड़ जमीन अजनोद में खरीदी, प्रशासन को मिली रजिस्ट्री
एरोड्रम रोड स्थित विद्याधाम के पीछे अंबिकापुरी एक्सटेंशन में श्रीसिद्ध कालीधाम मंदिर है। बताया जा रहा है कि मंदिर के पुजारी स्वामी वेद प्रकाशानन्द की 2008 में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या हो गई थी। इसके बाद मंदिर का संचालन कंप्यूटर बाबा के हाथों में चला गया था। अंबिकापुरी के मंदिर को कब्जे में लेने की कार्यवाही के दौरान वहां निर्मित कमरे में बाबा के बैठने की सिंहासन नुमा कुर्सी तो मिली ही।
इसके अलावा अलमारी से सांवेर क्षेत्र के अजनोद की एक सवा तीन हेक्टेयर है, यानी करीब 8 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री भी मिली है। यह जमीन कंप्यूटर बाबा ने अपने नाम से खरीदी थी। विक्रय पत्र में 11 साल पहले खरीदी इस जमीन की कीमत तत्कालीन गाइडलाइन के मुताबिक 10 लाख दर्शायी गई है, जिसकी वर्तमान में कीमत 4-5 से करोड़ आंकी जा रही है। प्रशासन अब इस रजिस्ट्री की जांच भी करवा रहा है कि आखिर इस जमीन को बाबा ने कैसे खरीदी और वर्तमान में इस जमीन का क्या उपयोग हो रहा है।

बाबा का कब्जा हटने के बाद लोग मंदिर में दर्शन को पहुंचे।
कार्रवाई के दौरान बाबा के नाम मिली रजिस्ट्री
एडीएम अजय देव शर्मा ने बताया कि अजनाेद में कार्रवाई के दौरान एक रजिस्ट्री भी मिली है। इसके अनुसार कंप्यूटर बाबा ने शंकर पिता रामकिशन खाती ने 2009 में हल्का नंबर 11 ग्राम अजनोद में 10 लाख रुपए में कृषि भूमि खरीदी थी। इसमें तीन हेक्टेयर जमीन बाबा ने खरीदी थी। यहां मंदिर बनाकर जमीन की खरीद-फरोख्त के लिए इसका उपयोग किया जा रहा था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बाबा के नाम पर मिली रजिस्ट्री है। यहां पर गांधी नगर यूनियन बैंक के खाते की एक पासबुक भी मिली है। यह खाता भी बाबा के नाम पर है। प्रशासन ने बैंक को पूरे ट्रांजेक्शन के बारे में जानकारी देने को कहा है।
शर्मा के अनुसार श्री दक्षिण कालीपीठ महामंदिर में कुछ कमरे भी बने मिले हैं। रहवासी संघ का कहना है कि इनका उपयोग रहवासी संघ द्वारा उपयोग में लिया जा सकता है। अभी इसे नगर निगम और रहवासी संघ संचालित कर सकता है। प्रशासन इसका आधिपत्य रहवासी संघ को देने पर विचार कर रहा है।

मंदिर में कार्रवाई करने पहुंचे दल ने भी दर्शन किए।

टीम ने यहां पर ज्यादातर निर्माण काे नहीं ढहाया।