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दतियाएक घंटा पहले
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उपार्जन केंद्र पर धान बेचने वाले कृषकों के लिए संबंधित तहसीलदार से रकबा सत्यापित कराया जाना आवश्यक है। कुछ पंजीकृत कृषकों के रकबे का सत्यापन एसडीएम की आईडी से फर्जी तरीके से किया गया है। खरीदी समापन पर है तक आनन फानन में फर्जी कृषकों के पंजीयन के सत्यापन को लेकर आदेश जारी किया है। केंद्रों पर करीब 150 किसानों की धान खरीदने पर रोक लगाई है। सवाल यह है कि जो फर्जी किसान फसल बेच चुके होंगे उन पर क्या कार्रवाई होगी। साथ ही एसडीएम की आईडी किसने लीक की और किसने ये सत्यापन किए यह भी जांच का विषय है।
शासन ने धान की खरीद के लिए सेंवढ़ा अनुभाग में 5 केंद्र स्थापित किए गए हैं। यह सभी केंद्र 19 नवंबर तक सभी पंजीकृत और सत्यापित कृषकों के रकबे के मान से खरीद कर रहे थे। जिले में खरीदी 25 नवंबर तक होना है। एसडीएम अनुराग तीन दिन से खरीद केंद्र की जांच कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने पाया कि कई कृषकों के रकबे का सत्यापन उन्हीं की आईडी से हुआ था। जबकि स्वयं उनके द्वारा कोई सत्यापन नहीं किया गया। इसके बाद एसडीएम ने खरीद केंद्रों को पत्र जारी कर एसडीएम आईडी से हुए सत्यापन को अनाधिकृत मानते हुए यह आदेश दिया कि ऐसे सत्यापन की धान का उपार्जन न किया जाए। पत्र के साथ एसडीएम की कृषक सत्यापन आईडी से सत्यापित पंजीकृत कृषकों की सूची भी संलग्न की गई। इसके साथ ही अनुभाग में इस प्रकार के सत्यापित कृषकों की धान खरीद पर रोक लग गई है।
एसडीएम ने बताया कि किसी तकनीकी खराबी के कारण यह समस्या आई है। इसका शिकार सेंवढ़ा के साथ-साथ भांडेर एवं दतिया भी हुआ है। इस मामले की जांच की जा रही है। तब तक एसडीएम आईडी से सत्यापित कृषकों की धान नहीं ली जाएगी जबकि तहसीलदार सत्यापित सर्वे नंबरों की खरीद जारी रहेगी। यहां बता दें कि उपचुनाव में व्यस्त रहे प्रशासन ने 25 अक्टूबर से होने वाली खरीद देरी से प्रांरभ की जिसके चलते कुल पंजीकृत कृषकों में से 20 फीसदी की ही धान उपार्जन की जा सकी है। जबकि 25 नवंबर अंतिम तिथि है। अगर तिथि आगे नहीं बढ़ी तो हजारों किसान धान केंद्र पर बेचने से रह जाएंगे।