नहीं की जान की परवाह: आग में घिरे कोरोना मरीजों को बचाने जान पर खेल गए डॉक्टर, बिना पीपीई किट के बचाई जान

नहीं की जान की परवाह: आग में घिरे कोरोना मरीजों को बचाने जान पर खेल गए डॉक्टर, बिना पीपीई किट के बचाई जान


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15 मिनट पहले

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सुपर स्पेशियलिटी में आग के समय बाहर से आया नया कोरोना मरीज को करीब 2 घंटे तक एंबुलेंस में ही बैठना पड़ा

सुपर स्पेशियलिटी के आईसीयू में आग और धुंए से घिरे 9 कोरोना मरीजों को बचाने वहां का स्टाफ और डॉक्टर अपनी जान तक पर खेल गए। डॉक्टर और अन्य स्टाफ बिना पीपीई किट के कोविड वार्ड में पहुंचे और कोरोना मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। तत्काल इन मरीजों को चौथी मंजिल से नीचे तीसरी मंजिल पर आईसीयू में शिफ्ट किया गया। 9 मरीज ऑक्सीजन पाइप पर थे। इनमें से एक भी वेंटीलेटर पर नहीं था। यदि स्टाफ पीपीई किट पहनने के चक्कर में लग जाता हो हादसा बहुत गंभीर हो सकता था। यदि कहीं ऑक्सीजन पाइप और टैंक तक आग पहुंच जाती तो हालात काबू से बाहर हो जाते।

ग्वालियर-चंबल अंचल के सबसे बड़े अस्पताल सुपर स्पेशियलिटी में जिस समय आग लगी थी वहां सुपर स्पेशियलिटी के नोडल ऑफिसर निलिमा टंडन, निलिमा सिंह वहीं मौजूद थीं। आग लगते ही वह अपने स्टाफ के साथ सीधे चौथी मंजिल पर आईसीयू में पहुंच गईं। यहां स्थिति देखकर उन्हें लगा की पीपीई किट पहनने का समय नहीं है। तत्काल उन्होंने शोर मचाकर अन्य डॉक्टरों को बुलाया। खुद भी आईसीयू में अंदर पहुंची गई। तत्काल सभी मरीजों को अस्पताल के अन्य वार्ड में पहुंचाया। इस समय तक डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. आरकेएस धाकड़, डॉ. ओपी जाटव और मैनेजर अरविंद राठौर भी वहां पहुंचे और व्यवस्थाएं संभाली। मरीजों को बाहर निकालकर आग पर काबू पाया।

बाहर खड़े रहे कोविड़ मरीज

जब आग लगी थी और अस्पताल में भगदड़ सी मची थी इसी समय शहर के लश्कर सर्कल से एक कोविड मरीज को लेकर एंबुलेंस सुपर स्पेशियलिटी पहुंची, लेकिन करीब 2 घंटे तक मरीज को बाहर एंबुलेंस में ही रखे रहे।

किट पहनते तो जा सकती थी जान

कोविड अस्पताल में मरीजों को बचाने वाली डॉ निलिमा सिंह और निलिमा टंडन ने बताया कि जब तक किट पहनते तो किसी मरीज की जान पर बन जाती। इसलिए उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं की है।

अपनो की चिंता में पहुंचे अस्पताल

सुपर स्पेशियलिटी में आग की खबर जब सोशल मीड़िया पर फैली तो वहां भर्ती मरीजो के परिजन अस्पताल पहुंच गए। कुछ समय के लिए तो वहां काफी भीड़ हो गई थी। जब सभी को बताया गया कि छोटा हादसा और सभी सुरक्षित हैं तब लोगों की जान में जान आई।



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