नगरीय निकाय: खुद की आय के स्राेत बढ़ाने और वसूली पर जोर नहीं दिया, नतीजा अब निकाय आत्म सरकार निर्भर,

नगरीय निकाय: खुद की आय के स्राेत बढ़ाने और वसूली पर जोर नहीं दिया, नतीजा अब निकाय आत्म सरकार निर्भर,


  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Hoshangabad
  • Emphasis Was Not Given On Increasing The Source Of Income And Recovery, Now The Result Is Self government Dependent,

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नर्मदापुरम संभाग15 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • सरकार ने चुंगी 30% घटाई तो निकायों में वेतन बांटना हुआ मुश्किल, पुराने काम और नई योजनाएं ठप
  • 7 महीने में संपत्ति कर 3.66 कराेड़ ही वसूल पाए, वेतन के लिए ही हर महीने 3.40 कराेड़ रु. कम पड़ रहे

संभाग की नगरीय निकाय आत्मनिर्भर नहीं हाे पाई हैं। अभी भी सरकार से मिलने वाली राशि पर ही निर्भर हैं। प्रदेश सरकार ने हर महीने दी जाने वाली चुंगी की राशि 30 प्रतिशत कम कर दी है। इससे निकायाें में वेतन बांटना मुश्किल हाे गया है।

संभाग की 18 नगरीय निकायाें के आंकड़े बताते हैं कि खुद की आय के स्राेत बढ़ाने और कराें की वसूली करने से निकायों ने ध्यान इस कदर हटा रखा है कि जमा राशि से कर्मचारियाें का वेतन भी नहीं बंट पा रहा है। पुराने काम और नई योजनाएं ठप हैं, क्योंकि पैसा नहीं है। जैसे-तैसे मूलभूत सुविधाएं की जा रही हैं।

संभाग की 18 निकायाें के आंकड़ाें से समझिए हालात
8.6 कराेड़ मिलती थी चुंगी, जिससे बंटता था वेतन, अब 6.04 कराेड़ चुंगी मिल रही।

9.44 कराेड़ रु. वेतन बनता है, चुंगी की राशि लेने के बाद भी 3.40 कराेड़ रु. हर महीने कम पड़ते हैं

7 महीने में संपत्ति कर की 15% ही वसूली
संभाग की 18 निकायाें का 2020-21 का टारगेट 24.06 कराेड़ रुपए है। 7 महीने में सितंबर तक इसमें से 3.66 कराेड़ रुपए की वसूली हुई है। यह कुल टारगेट का 15% है। नगरीय निकायाें के स्वामित्व की दुकानाें के किराये का 2020-21 का 4.12 कराेड़ रुपए का टारगेट था। सितंबर तक वित्तीय वर्ष के 7 महीनाें में 93 लाख रु. यानी 22% वसूली हाे पाई है।

जानिए निकायों में पैसे की कमी के कारण कौन से जरूरी काम नहीं हो पा रहे हैं

होशंगाबाद : पेयजल योजना की राइजिंग लाइन 8 करोड़ रुपए से बदलाएगी, लेकिन रुपए नहीं हैं। नर्मदा में मिलने वाले कोरी घाट के नाले को रोकने के लिए 33 लाख रुपए चाहिए। सेठानी घाट का सौंदर्यीकरण 10 लाख में होना है। एई आरसी शुक्ला ने बताया रुपए नहीं होने से काम शुरू नहीं किए हैं।

बैतूल : 33 वार्डों में डेढ़ करोड़ रुपए से सड़कों का डामरीकरण एक साल से पेडिंग है। 15 लाख रुपए से जर्जर स्कूलों को तोड़ने का काम किया जाना है। एक करोड़ रुपए से 9 चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल का प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पा रहा। कई बार प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

हरदा : 30 लाख रुपए पेयजल पाइपलाइन बिछाना है। जाेशी काॅलाेनी, वार्ड क्रमांक 35, बाइपास राेड, यादव छात्रावास, मदीना काॅलाेनी अादि क्षेत्राें में 8 किमी में पेयजल पाइपलाइन बिछाई जानी है। यह काम 8 माह से रुका है। 35 पार्क बदहाल हैं। साैंदर्यीकरण नहीं हाे रहा है। 64 लाख रुपए की जरूरत है।

आर्थिक स्थिति में सुधार का प्रस्ताव बना रहे हैं

संभाग में नगरीय निकायाें की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए शासन स्तर से उपभाेक्ता प्रभार तय किया जा रहा है। अभी इसे लेकर प्रस्ताव तैयार हाे रहा है। हाेशंगाबाद में भी 25 नवंबर तक मीटिंग हाेगी।

इसमें जिले की नगरपालिका, नगर परिषद में प्रभार क्या हाे इसे लेकर रूपरेखा तय हाेगी। निकाय जाे भी सुविधाएं देते हैं उसका शुल्क जनता से लेंगे उसका नाम उपभाेक्ता प्रभार हाेगा। नए वित्तीय वर्ष से यह लागू हाे सकता है। -सुरेश बेलिया, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन



Source link