उज्जैन में जल कपट क्यों?: 66.27 करोड़ खर्च, फिर भी पूरे शहर को नहीं मिल पा रहा पीएचई का पानी

उज्जैन में जल कपट क्यों?: 66.27 करोड़ खर्च, फिर भी पूरे शहर को नहीं मिल पा रहा पीएचई का पानी


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उज्जैन19 घंटे पहले

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विक्रमनगर क्षेत्र में पीएचई के पानी सप्लाई के लिए बनाई जा रही टंकी।

  • अब ऐसी कॉलोनियों का सर्वे करवाएगा निगम जहां पीएचई की पाइप लाइन नहीं, तोड़ी जा सकती है पक्की सड़कें

शहर की जलप्रदाय व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जेएनएनयूआरएम के तहत नई पाइप लाइन बिछाने सहित अन्य काम तापी कंपनी से करवाए थे। 396 किमी में लाइन डालकर 55 हजार नल कनेक्शन करना उसके जिम्मे था। 66 करोड़ 27 लाख रुपए प्रोजेक्ट के बावजूद पूरे शहर में पेयजल सप्लाय पटरी पर नहीं आ पाई।

एमआर-5 से सटी कॉलोनी रतन गोल्ड के रहवासियों ने ऊंचे दाम देकर प्लॉट और मकान खरीदे। अब वे ठगा महसूस कर रहे हैं। इसकी वजह कॉलोनी में पीएचई की पाइप लाइन नहीं होना है। रतन गोल्ड ऐसे अकेली कॉलोनी नहीं है। शहर की 33 कॉलोनियों में सड़क, बिजली तो है लेकिन पानी का बंदाेबस्त उन्हें खुद करना पड़ रहा है।

इन कॉलोनियों की सीमेंट कांक्रीट की सड़कों को पाइप लाइन डालने के लिए तोड़ा जा सकता है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने शनिवार को पीएचई अमले को निर्देश दिए कि वे ऐसी कॉलोनियों का सर्वे करें जिनमें पीएचई की लाइन नहीं है।

इसका मकसद शहर के हर घर में पीएचई की पाइप लाइन से पानी पहुंचाना है। उनका कहना है वर्तमान में पूरे शहर में जलप्रदाय के लिए मुख्य स्रोत गंभीर डेम है। शहर विस्तार होने से वैकल्पिक जलस्रोतों की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में प्रदेश सरकार को दो प्रस्ताव भेजे हैं, जिससे गंभीर डेम पर निर्भरता कम हो और नई बसी कॉलोनियों को भी पर्याप्त पानी दिया जा सके।



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