सूफियाना महफिल: छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाके…

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भोपाल10 मिनट पहले

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जनजातीय संग्रहालय में मो. साजिद और आमिर हफीज ने दी सूफियाना गायिकी की प्रस्तुति

  • जनजातीय संग्रहालय में सूफी परंपरा की सांगीतिक प्रस्तुति

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित बहुविध कला अनुशासनों की गतिविधियों पर एकाग्र गमक श्रृंखला अंतर्गत बुधवार को मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की ओर से सूफी परंपरा की सांगीतिक प्रस्तुति हुई। जिसमें गजल गायक मो. साजिद, आमिर हफीज एवं कीर्ति सूद ने प्रस्तुति दी। प्रस्तुति की शुरुआत इरफान सिद्दीकी के कलाम- बिस्मिल्लाह तेरे नाम से की…। इसके बाद मौला-मौला दरारे-दराहे है माथे पे मौला- प्रसून जोशी, तु कूजा मन कूजा- मुजफ्फर वारसी, और रंग रेजा रंग दरिया में- प्रसून जोशी, कभी ए हकीकतें मुंतजर नजर आ लियासे मजाज में- डॉ. अल्लामा इकबाल, अल्ला हू अल्ला हू- मौलाना सैयद हसन, छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाके, आज रंग है री मां रंग है-अमीर खुसरो, दमा दम मस्त कलंदर- बुल्ले शाह आदि के गीतों का गायन किया। तबले पर नईम अल्लाहवाले, कीबोर्ड पर मुकेश कटारे एवं शाहिद मासूम, गिटार पर अरशद अल्लाहवाले, ओक्टोपेड पर वसीम मासूम और कोरस पर मुजम्मिल और जमीर ने संगत दी।

मो. साजिद मेवात घराने से ताल्लुक रखते हैं। संगीत इन्हें विरासत में मिला है। आप लगभग बीस वर्षों से संगीत पर काम कर रहे हैं। देश-विदेश के विभिन्‍न मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। आप सूफी, गजल, सेमी क्लासिकल और सात क्षेत्रीय भाषाओं में गाते हैं। वहीं आमिर हफीज भी मेवात घराने से ताल्लुक रखते हैं।



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