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इटारसी3 घंटे पहले
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भोपाल से नागपुर जाने वाला नेशनल हाईवे-69 बाघदेव के रेलवे पुल के नीचे से होकर गुजरता है। पत्थरों के पुल पर बिछाई गई सिंगल रेलवे लाइन 1913 में यातायात के लिए खोली गई थी। रेलवे ट्रैक दिल्ली मद्रास ग्रैंड ट्रंक मार्ग का एक भाग है। यह इटारसी-नागपुर रेल सेक्शन है। इस सेक्शन की 45 किलोमीटर रेलवे लाइन होशंगाबाद जिले में है। दोहरी लाइन बिछाने पर दूसरा पुल सीमेंट व लोहे से निर्मित किया गया। नागपुर की तरफ से बैतूल होते हुए ट्रेन इटारसी आती है तो जिले में कालाआखर पहला स्टेशन है फिर ताकू, कीरतगढ़ आते हैं। यहां से नागपुर रेल मंडल लग जाता है।
जंगल में बाघों के विचरण के कारण पड़ा बाघदेव नाम
बाघदेव पुल इटारसी शहर से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर है। पुल से गुजरती ट्रेन सतपुड़ा की वादियों के दर्शन करवाती है। यह पुल शहर के दक्षिण में है। यहां बाघों का विचरण होने से इस क्षेत्र का नाम बाघदेव पड़ा जो बाद में बोलचाल में बागदेव कहा जाने लगा।
पुरानी इटारसी से आगे बढ़ते ही पथरौटा, ऑर्डनेंस फैक्टरी रोड और कीरतपुर के बाद बाघदेव में हाईवे का घुमावदार मोड़ है। यहां सतर्कता नहीं बरतने पर सड़क हादसा होने का खतरा रहता है। इस समय यहां हाइवे को फोरलेन बनाने का काम चल रहा है। यहीं से सतपुड़ा पर्वत की सीमा शुरू हो जाती है। आगे धन्यवाद तिराहा है जहां से एक सड़क मार्ग तवानगर की तरफ मुड़ जाता है। जहां घना जंगल है। हाईवे पर ही केसला ब्लाक में आदिवासी बहुल गांव हैं। एक तरफ ताकू प्रूफ रेंज है जहां सेना बमों का परीक्षण करती है।