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- The Problem Of Drug Addiction Is Not Only In The Film Industry, But In The Whole Country: Piyush Mishra
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भोपाल8 मिनट पहलेलेखक: राजेश गाबा
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भोपाल मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय आए पटकथा, गीत लेखक और अभिनेता पीयूष मिश्रा।
- मप्र नाट्य विद्यालय आए फिल्म अभिनेता और पटकथा लेखक पीयूष मिश्रा से खास बातचीत
- पीयूष मिश्रा नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों को पटकथा लेखन और अभिनय की बारीकियां सिखाएंगे
पीयूष मिश्रा भारतीय साहित्य के बड़े नाम हैं। वे अभिनेता हैं, पटकथा लेखक हैं, गीतकार और कवि भी हैं। भोपाल मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय में वर्कशॉप लेने आए पीयूष मिश्रा ने फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स, नेपोटिज्म और तमाम मुद्दों पर खुलकर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की।
नशे की समस्या सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं, बल्कि देश में है। यह सिर्फ इंडस्ट्री को बदनाम करने साजिश है। यदि बात कोई बड़े नशे की हो तो मैं मान भी लेता कि इंडस्ट्री खराब है, लेकिन अभी तक जो सामने आया कोई बड़ी बात नहीं है।
लॉकडाउन में लिख डाली बहुत सी रचनाएं
लॉकडाउन की शुरूआत में घर में सीमित होकर मैं भी बहुत परेशान हो गया था, लेकिन फिर मैंने लिखना शुरू किया। मन लगाकर बहुत अच्छी रचना लिख डाली है जो लॉकडाउन के नाम से आप लोगों के सामने आएगी। मैंने आपदा को अवसर में बदल लिया। कोरोना काल ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। इस दौरान कुकिंग छोड़कर घर के अन्य काम किए और कुछ एड भी किए हैं।
नेपोटिज्म हर जगह है
पीयूष मिश्रा ने कहा कि नेपोटिज्म समाज में हर जगह है। कौन मां-बाप अपने बच्चे का भला नहीं चाहेगा। कौन नहीं चाहेगा कि उसका बच्चा स्टार बने। हर क्षेत्र में पिता की विरासत उनके बच्चे ही संभालते हैं, तो फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा क्यों ना हो। रही बात प्रतिभा की तो ऐसे कई लोग हैं जो बाहर से आकर इंडस्ट्री में पैसा और शोहरत कमा रहे हैं।
हिंदी में नहीं लिखे जा रहे अच्छे नाटक
हिंदी रंगमंच की स्थिति को लेकर पीयूष मिश्रा का कहना था कि अन्य भाषाओं की तुलना में हिंदी भाषा में नये नाटक नहीं लिखे जा रहे हैं। कुछ पुराने नाटक हैं, जिन्हें बार-बार अलग अंदाज में परोसा जा रहा है। हम नाट्य लेखन विधा में प्रवीण नहीं हो पाए हैं, जबकि विदेशों में शेक्सपियर के जमाने से ही अच्छे नाटक लिखे जा रहे हैं। हमारे देश में नाट्य लेखक कम पैदा हुए हैं, जिससे हम अनुवाद के सहारे हैं।
लौटेगा सिनेमा और रंगमंच का क्रेज
कोरोना संक्रमण के बाद से थिएटर बंद हैं। कुछ जगह खुले भी हैं तो कम लोग जा रहे हैं और फिल्में ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज हो रही हैं, तो क्या अब सिनेमा और रंगमंच का पहले वाला दौर लौटेगा? इस सवाल के जवाब में पीयूष मिश्रा का कहना था कि अब लोगों का डर कम हो रहा है। वैक्सीन आते ही पहले जैसा माहौल हो जाएगा और लोग फिल्म- नाटक देखने पहले जैसे ही जाने लगेंगे। कुछ बड़े फिल्म निर्माताओं ने अपनी फिल्में भी इसी इंतजार में रोक रखीं हैं। ओटीटी चलता रहेगा, लेकिन सिनेमा और रंगमंच का अपना अलग ही महत्व है, जो कभी कम नहीं होगा।