Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप
ग्वालियर3 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
एक ही अपराध की दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है। क्राइम ब्रांच एसआई कुलदीप बघेल के स्पष्टीकरण से अप्रसन्नता जताते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा ने उन्हें फिर से स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि वह ऐसा करने में विफल रहे तो उन्हें बाध्य होकर ग्वालियर एसपी अमित सांघी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश देना पड़ेगा।
दरअसल, 1 सितंबर को क्राइम ब्रांच ने विक्रम राणा को दोपहर 3.40 बजे गिरफ्तार करना बताया। तलाशी लेने पर उसके पास से देशी पिस्टल बरामद हुई। जिस पर आर्म्स एक्ट के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया। आठ बजे के लगभग फिर से तलाशी लेना बताया।
इसमें आरोपी के पास से वर्जित पदार्थ मिला। तब क्राइम ब्रांच ने एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। इस पर कोर्ट ने पूछा – जब आरोपी को दोपहर में हिरासत में लेकर तलाशी ले ली गई थी तो फिर बाद में तलाशी क्यों ली गई। यदि वह पुलिस कस्टडी में था तो फिर उसके पास से वर्जित पदार्थ कैसे मिला?