ध्य प्रदेश के हनीट्रैप केस की जांच फिर तेज हो गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनीट्रैप केस (Honey Trap Case) में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है.केस की जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) में अब राज्य शासन ने दो नए आईपीएस (IPS) अधिकारियों को शामिल किया है.
इंदौर डीआईजी रहते हुए रुचि वर्धन मिश्रा को एसआईटी का सदस्य बनाया गया था. लेकिन बाद में उनको एसआईटी से हटा दिया गया. अब फिर उन्हें एसआईटी का सदस्य बनाया गया है. इससे पहले जब उन्हें एसआईटी का सदस्य बनाया गया था उस समय कांग्रेस की सरकार थी और उसी दौरान उनको हटाया भी गया था. लेकिन अब प्रदेश में बीजेपी की सरकार है और एक बार फिर से उन्हें एसआईटी का सदस्य बनाया गया है. अभी एसआईटी चीफ एडीजी विपिन महेश्वरी हैं.
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बंद लिफाफे में वो 40 नामअगस्त में एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार ने हाईकोर्ट को बंद लिफाफे में करीब 40 आरोपियों के नाम सौंपे थे. इसके बाद मध्य प्रदेश की सियासत में सरगर्मी तेज है. पुलिस मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक में इन नामों की चर्चा हो रही है. सूत्रों ने बताया कि इन नामों में कई राजनेता और आईएएस और आईपीएस अफसर शामिल हैं.
ये है पूरा मामला
हनीट्रैप खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय ने सबसे पहले एसआईटी का गठन किया था. लेकिन, 24 घंटे के अंदर ही एसआईटी चीफ आईजी डी श्रीनिवास वर्मा को हटाया गया और एडीजी संजीव शमी को कमान सौंपी गई. संजीव शमी के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ पाती उससे पहले ही सरकार ने राजेंद्र कुमार को एसआईटी चीफ बना दिया. राजेंद्र कुमार की टीम में एडीजी मिलिंद कानस्कर, तत्कालीन डीआईजी इंदौर रुचि वर्धन मिश्रा शामिल थीं. बार-बार एसआईटी चीफ बदले जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए थे कि कोर्ट की अनुमति के बिना एसआईटी में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा.