न्यायप्रिय वंदन: न्यायालय को जीवन समर्पित करने वाली जज वंदना कसरेकर ने थाना प्रभारी को भिजवा दिया था जेल

न्यायप्रिय वंदन: न्यायालय को जीवन समर्पित करने वाली जज वंदना कसरेकर ने थाना प्रभारी को भिजवा दिया था जेल


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इंदौर17 मिनट पहले

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न्यायप्रिय रही जज वंदना कसरेकर ने रविवार को अंतिम सांस ली।

कोरोना की चपेट में आने के बाद अंतिम सांस लेने वाली जज वंदना कसरेकर को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। उन्होंने अपना पूरा जीवन न्यायालय को समर्पित कर दिया था। उनकी सख्त मिजाजी ऐसी थी कि एक बार पेशी पर नहीं आने वाले एक थाना प्रभारी को जेल भिजवा दिया था।

अपने जीवन के 23 से अधिक वर्ष उन्होंने न्यायालय को ही समर्पित कर दिए। इंदौर और जबलपुर में अपना जीवन का लंबा समय दिया। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता जीएम चापेकर के यहाँ से जूनियर के रूप में अपनी वकालत शुरू की थी। वकालत के समय कोर्ट में वे ताई के नाम से पहचानी जाती रही। सभी अधिवक्ता उन्हें ताई के नाम से ही बुलाते थे। शुरुआत से ही वह न्याय प्रिय, हंसमुख और जिंदादिल थी। कानून की बारीकियों पर उनकी अच्छी पकड़ थी।

कोर्ट कर्मचारी ने थाने में लगा ली थी फांसी
फरवरी 2015 में पंकज वैष्णव नामक एक कोर्ट कर्मचारी ने थाने के अंदर ही जूते की लेस से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में थाना प्रभारी एमएस सैयद को उम्मीद थी कि हाईकोर्ट से उन्हें बेल मिल जाएंगी लेकिन वंदना कसरेकर ने उन्हें कोर्ट में सरेंडर होने के लिए एक माह का समय दिया था और जिसके बाद उन्हें सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था। फरियादी के अधिवक्ता धर्मेंद्र गुर्जर ने बताया कि जब यह मामला इंदौर हाईकोर्ट में आया और उस समय वंदना मेडम की बेंच पर यह मामला गया तो हमें यह अंदेशा था कि शायद थाना प्रभारी को जमानत मिल जाएंगी लेकिन थाना प्रभारी को जेल भेज कर उन्होंने एक बड़ा न्याय मृतक के परिजनों साथ किया था।



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