कोरोना में कन्फ्यूजन: आरटीपीसीआर टेस्ट पर भी शक, रिपोर्ट निगेटिव मिल रही, इधर, सीटी स्कैन बता रहा संक्रमण

कोरोना में कन्फ्यूजन: आरटीपीसीआर टेस्ट पर भी शक, रिपोर्ट निगेटिव मिल रही, इधर, सीटी स्कैन बता रहा संक्रमण


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रतलाम22 मिनट पहले

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आरटीपीसीआर मशीन।

  • रैपिड एंटीजन खो चुकी भरोसा, क्रिटिकल हालत के बीच दो से तीन दिन कर रहे रिपोर्ट का इंतजार

जिले में कोरोना की रिपोर्ट को लेकर बड़ा कंफ्यूजन बन रहा है। रैपिड एंटीजन टेस्ट किट पर तो पहले ही भरोसा नहीं था, अब आरटीपीसीआर के भी गड़बड़ परिणाम सामने आने लगे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, आरटीपीसीआर मशीन से जिन मरीजों को निगेटिव बता रहे हैं, वो मरीज हाई रेज्युलेशन सीटी स्कैन यानी एचआरसीटी में संक्रमित दिख रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर भी एचआरसीटी से मरीज को पॉजिटिव मानकर ही इलाज कर रहे हैं।

जिले में दो तरीकों से मरीजों की जांच की जा रही है। रैपिड एंटीजन व आरटीपीसीआर टेस्ट। रैपिड एंटीजन में तत्काल परिणाम सामने आते हैं तो वहीं आरटीपीसीआर में 24 घंटे से ज्यादा समय लग जाता है। अब तक आरटीपीसीआर को ही भरोसेमंद माना जा रहा था, लेकिन अब इधर भी परिणाम कंफ्यूजन वाले सामने आ रहे हैं।

पीसीआर मशीन जिन मरीजों को निगेटिव बता रही है, वह एचआरसीटी में पॉजिटिव दिख रहे है। हालांकि, अब डॉक्टर भी कोरोना के मामले में एचआरसीटी को ही सबसे ज्यादा भरोसेमंद मान रहे हैं।

संक्रमण के पैटर्न में यह अंतर, इसलिए, तत्काल पता चल जाता है यह पॉजिटिव

कोरोना संक्रमण का पैटर्न अन्य संक्रमण से अलग है। इसके फेफड़ों पर अटैक करने का तरीका अन्य से बिल्कुल ही अलग है। ऐसे में सीटी स्कैन में तत्काल पता चल जाता है कि ये कोविड पॉजिटिव है।

आरटीपीसीआर ने बताया निगेटिव, फिर पॉजिटिव

50 साल के एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ी। फीवर क्लीनिक में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई। हालांकि, डॉक्टर को विश्वास नहीं था, उन्होंने एचआरसीटी करवाने की सलाह दी, इसमें पॉजिटिव के लक्षण थे। पॉजिटिव मानकर ही उनका इलाज किया गया।

60 साल के बुजुर्ग ने कोविड जांच करवाई। उनकी रिपोर्ट पहले निगेटिव आई थी। उन्होंने एचआरसीटी करवाया। इसके बाद घर पर ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। दोबारा जांच करवाई तो पॉजिटिव निकले। इसके बाद उन्हें भर्ती किया गया।

ये मामला 40 साल के व्यक्ति का है। पहले आरटीपीसीआर से उनकी रिपोर्ट निगेटिव मिली थी। लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो वे इंदौर गए। वहां डॉक्टर ने एचआरसीटी की सलाह दी। पॉजिटिव आए इसके अनुसार ही इलाज किया गया।

आरटीपीसीआर किट की कंपनी बदली इसलिए ऐसी दिक्कत

इधर, डॉक्टरों में ही चर्चा ये भी है कि आरटीपीसीआर किट भी एक कारण है। पहले किसी अन्य कंपनी की किट आती थी, जो अब अलग कंपनी की है। ऐसे में नेगेटिविटी रेट भी ज्यादा सामने आ रहा है। हालांकि, डॉक्टरों का ये दावा भी है कि आरटीपीसीआर किसी नेगेटिव को पॉजिटिव नहीं बताती।

टेक्निकल एरर के मामले भी बढ़े ये दो बड़े कारण

1. सैंपल लेते समय यदि गले के अंदर सबसे पिछले भाग तक स्ट्रिप नहीं जाती है, जीभ या आसपास से सैंपल आ जाता है तो एरर बताता है।

2. नाक से भी अंदर तक स्ट्रिप नहीं जाती है, जब स्ट्रिप डालते हैं तो मरीज को दर्द होता है, इससे या तो वह चेहरा पीछे करता है या सैंपल लेने वाले का हाथ पकड़ लेता है।

चार प्राइवेट सीटी स्कैन सेंटर, लेेकिन सरकारी एक भी नहीं

शहर में चार सीटी स्कैन सेंटर हैं लेकिन, सभी प्राइवेट हैं। जिले में एक भी सरकारी सीटी स्कैन नहीं है। जिला अस्पताल में इसका 6 साल से प्रोजेक्ट कागजों पर ही चल रहा है। प्रशासन इसके दो माह में शुरू होने की बात कह रहा है। इधर, मेडिकल कॉलेज के मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में भी सीटी स्कैन मशीन लगना बाकी है।

आरटीपीसीआर सबसे अच्छा टेस्ट है। लेकिन, 100 प्रतिशत सटीक कोई भी नहीं होता। हालांकि, यदि कोई मरीज आरटीपीसीआर में निगेटिव है और एचआरसीटी में लक्षण दिख रहे हैं तो हम पॉजिटिव मानकर ही इलाज करते हैं। ऐसे कई पैशेंट हैं जो निगेटिव होने के बाद भी कॉलेज के सस्पेक्टेड वार्ड में 10 दिन तक रहकर जा चुके हैं। परिजन विरोध भी करते हैं। उनका कहना होता है निगेटिव हैं तो अस्पताल में क्यों रख रहे हो।

डॉ. शशि गांधी, डीन, मेडिकल कॉलेज, रतलाम

एचआरसीटी की रिपोर्ट ज्यादा विश्वसनीय है। ऐसा इसलिए क्योंकि अंदर की हलचल आपके सामने होती है। मैं खुद एचआरसीटी को लेकर काम करता हूं।
डॉ. राजेश शर्मा, प्राइवेट कोविड हॉस्पिटल संचालक



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