यादों में ओमपुरी: ‘ओमप्रकाश जिंदाबाद’ के बहाने फिर जिंदा होंगी ओमपुरी की यादें, भोपाल के कलाकार इश्तियाक भी फिल्म में नजर आएंगे

यादों में ओमपुरी: ‘ओमप्रकाश जिंदाबाद’ के बहाने फिर जिंदा होंगी ओमपुरी की यादें, भोपाल के कलाकार इश्तियाक भी फिल्म में नजर आएंगे


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भाेपाल37 मिनट पहलेलेखक: राजेश गाबा

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‘ओमप्रकाश जिंदाबाद’ फिल्म की शूटिंग के दौरान ओमपुरी के साथ इश्तियाक खान।

  • ओमपुरी की आखिरी फिल्म से जुड़ी यादों को भास्कर के साथ इश्तियाक खान ने साझा किया
  • सूरमा भोपाली के नाम से मशहूर हास्य कलाकार जगदीप की भी आखिरी फिल्म है

हिंदी सिनेमा के बड़े कलाकारों में से एक रहे ओम पुरी आज हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनके निभाए किरदार आज भी फैंस के दिलों में जिंदा हैं। बड़े पर्दे पर ओम पुरी की झलक पाने का एक और मौका मिलने जा रहा है। एक्टर ओम पुरी के निधन के 4 साल बाद आज उनकी आखिरी फिल्म ‘ओमप्रकाश जिंदाबाद’ रिलीज हो रही है। फिल्म में ओम पुरी के साथ अहम किरदार में भोपाल के अभिनेता इश्तियाक खान भी नजर आएंगे।

इश्तियाक इससे पहले अज्ञात, मस्तराम, फटा पोस्टर निकला हीरो, फंस गए रे ओबामा, अनारकली आरा, जॉली एलएलबी, भारत और लूडो में कई अहम किरदार निभा चुके हैं। इश्तियाक खान ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में ओम पुरी के साथ शूटिंग में बिताए अनुभव को शेयर किया। खास बात है कि सूरमा भोपाली के नाम से मशहूर हास्य कलाकार जगदीप की भी यह आखिरी फिल्म है।

अज्ञात फिल्म का स्पॉट ब्वॉय लक्ष्मण हो या फिर फंस गए रे ओबामा फिल्म के इंग्लिश टीचर हो या माय नेम इज एंथोनी गोंजाल्विस का विलेन हो। इश्तियाक ने काॅमेडी, निगेटिव और सभी तरह के कैरेक्टर में खुद को ढाल लिया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक इश्तियाक ने अभिनय से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई। इश्तियाक ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि मुझे महान Actor ओम पुरी के साथ काम करने को मौका मिला। उनकी आवाज अविस्मरणीय है। इस फिल्म के साथ बहुत सारी यादें जुड़ी हुई हैं।

कलाकार और उनके अभिनय कौशल कभी नहीं मरते। वे हमेशा दर्शकों के साथ रहते हैं। ओम पुरी सर ऐसे अविश्वसनीय Actor थे। साथ ही, जगदीप सर को मेरी श्रद्धांजलि, क्योंकि यह उनकी भी यह आखिरी फिल्म है। यह बहुत भावनात्मक भी है, क्योंकि दोनों अद्भुत कलाकार हमारे बीच मौजूद नहीं हैं। इस फिल्म का निर्देशन रंजीत गुप्ता ने किया है। इसमें कुलभूषण खरबंदा, राम सेठी, सीमा आजमी, खुश्बू कमल और अभय जोशी जैसे नामी कलाकार भी हैं।

हास्य से भरी हुई है फिल्म

इश्तियाक ने बताया कि यह फिल्म बेसिकली यूपी में निचले तबके की रेप विक्टिम को सरकार की तरफ से मिलने वाले कंपेनशेसन की बंदरबांट पर एक सटायरिकल टेक है। ओम पुरी इसमें छुटभइए नेता के रोल में नजर आएंगे, जो सरकार की तरफ से आने वाली कंपेनशेसन के करोड़ों की रकम हड़पने के रैकेट में शामिल हैं। वह रैकेट कैसे रेप के फर्जी विक्टिमों को सामने लाकर सरकारी पैसों की लूटमार करता है, फिल्म इसी बारे में है। वहीं, जगदीप सर ने फिल्म में नेगेटिव रोल निभाया है। वो रेपिस्ट के किरदार में नजर आएंगे।

फिल्म ओमप्रकाश जिंदाबाद के एक दृश्य में ओमपुरी के साथ इश्तियाक खान।

फिल्म ओमप्रकाश जिंदाबाद के एक दृश्य में ओमपुरी के साथ इश्तियाक खान।

ओमपुरी सर की फिल्में देखकर सीखा अभिनय

इश्तियाक ने बताया कि मैंने भोपाल में अपने गुरु रंग निर्देशक स्वर्गीय अलखनंदन जी के साथ रंगमंच को जाना। मैं शुरू से ओमपुरी सर के अभिनय का कायल रहा। उनकी हर फिल्में देखता और अभिनय के अलग-अलग क्राफ्ट को समझता। ओमपुरी सर का काम हम सभी कलाकारों को हमेशा सिखाता है।

सेट पर सभी के साथ दोस्त की तरह रहते थे ओम सर

‘ओमप्रकाश जिंदाबाद’ की शूटिंग के सेट पर काफी हंसी-मजाक करते थे। वह काफी सहज-सरल थे। नए कलाकारों से भी ऐसे मिलते जैसे उनके दोस्त हों। वह साथ के कलाकारों का डर दूर कर देते थे। सेट पर हम सभी के साथ हंसी मजाक करते, लेकिन जैसे ही एक्शन की आवाज सुनते, ऑन कैमरा वो किरदार में इतने डूब जाते थे कि लगता ही नहीं था कि थोड़ी देर पहले इतनी मस्ती करने वाला इंसान कैसे अचानक इतना इमोशनल सीन इतनी शिद्दत से निभाता है। उनसे सीखा कि कैसे अपने आपको किरदार में डुबोया जाता है। वह हर सीन के बाद समझाते थे कि निर्देशक का निर्देशन होता है, लेकिन एक कलाकार के रूप में हमें इंप्रोवाइजेशन करना जरूरी है कि हमने उस सीन में क्या किया। सिर्फ मिली हुई स्क्रिप्ट को कैमरे के सामने बोलना एक्टिंग नहीं होता।

जगदीप सर का एनर्जी लेवल देखते ही बनता था

जगदीप सर के साथ काम करना भी जीवन के यादगार पलों में से एक है। उनका निभाया सूरमा भोपाली का किरदार जीवंत बन गया। इतने सीनियर कलाकार होकर वे बच्चों की तरह सेट पर होते थे। उनका एनर्जी लेवल इस उम्र में भी देखते ही बनता था।

फिल्म रिलीज में इसलिए हुई देरी

दिवंगत ओमपुरी की आखिरी फिल्म आज रिलीज हो रही है। निर्माता-निर्देशक को सेंसर बोर्ड और फिर ओम पुरी के निधन जैसे कई मुद्दों का सामना करना पड़ा। इसके लिए मेकर्स को सेंसर की ट्रिब्यूनल बॉडी तक जाना पड़ा। वहां से फिल्म को ए सर्टिफिकेट जारी हुआ। तीन साल के लंबे इंतजार और जद्दोजहद के बाद सेंसर से पास हुई। फिल्म का नाम ‘रामभजन जिंदाबाद’ से बदलकर ‘ओमप्रकाश जिंदाबाद’ कर दिया गयाा। सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद फिर COVID-19 के कारण इसे आज देशभर में रिलीज किया जा रहा है।



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