योजना: 33 गौशाला तैयार, 3000 मवेशी रखे जाएंगे, यहां जैविक खाद-गोकाष्ठ भी बनाए जाएंगे

योजना: 33 गौशाला तैयार, 3000 मवेशी रखे जाएंगे, यहां जैविक खाद-गोकाष्ठ भी बनाए जाएंगे


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  • 33 Cowsheds Ready, 3000 Cattle Will Be Kept, Organic Manure And Cow Milk Will Also Be Made Here.

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सागर19 घंटे पहले

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सागर| जिले में बनाई गई गौशाला में गायों को चारा डालती महिलाएं।

  • पड़रिया में पहुंची 100 गाय, शेष जगह भी मवेशियों को पकड़कर भेजा जाएगा

जिले की 33 ग्राम पंचायतों में गौशाला बनकर तैयार हो गई हैं। इनमें से 10 का उद्घाटन हो चुका है तो पड़रिया गौशाला में 100 गाय भी पहुंच गई हैं। 31 दिसंबर तक सभी गौशालाओं में मवेशी पहुंचाने की योजना है। इनमें 40% दुधारू गाय रहेंगी तो 60% अन्य मवेशी होंगे। प्रत्येक गौशाला में 100-100 मवेशियों को रखा जाएगा।

यानी सभी गौशालाओं में 3300 आवारा मवेशियों को रखा जाएगा। यह संख्या इतनी है कि सागर शहर में विचरण करने वाले 1267 आवारा मवेशियों को यदि यहां शिफ्ट कर दिया जाए तो एक ही बार में शहर की यह समस्या खत्म हो जाएगी। हालांकि शासन के जो नियम हैं, उसके अनुसार सबसे पहले गौशाला के नजदीक के क्षेत्र में घूमने वाले आवारा मवेशियों को पकड़कर इनमें रखा जाएगा। गौशाला के संचालन का जिम्मा स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सौंपा गया है।

वर्मी कम्पोस्ट यूनिट बनेंगी, प्रशिक्षण देंगे
गौशाला परिसर में वर्मी कंपोस्ट यूनिट बनाकर जैविक खाद तैयार की जाएगी। इसके अलावा गौशालाओं में पशुओं के गोबर व मूत्र का उपयोग भी जैविक खाद के रूप में किया जा सकेगा। ग्रामीणों को इसका प्रशिक्षण भी इन गौशालाओं में दिया जाएगा। इससे गांव में न सिर्फ पशुपालन बढ़ेगा बल्कि जैविक खाद से कृषि का उत्पादन भी बेहतर किया जा सकेगा।

अगले साल तक 153 गौशालाएं और बनेंगी
पहले चरण में प्रत्येक जनपद में 3-3 गौशाला ही बनाई गई थीं। अब इनका विस्तार करने की भी कार्ययोजना बनाई गई है। जिले को शासन से 153 गौशालाओं को और बनाने का लक्ष्य दिया गया है। ऐसे में अगले साल 153 और बड़ी गौशाला बनना शुरू हो जाएंगी। इनमें 15 हजार से अधिक मवेशी रखे जाएंगे। जिसके बाद जिले भर में आवारा मवेशियों की समस्या भी पूरी तरह से ही खत्म हो जाएगी।

27 लाख रु. की लागत, 6 एकड़ का परिसर
6 एकड़ के परिसर में गौशालाओं का निर्माण 27 लाख रुपए की लागत से हुआ है। इसमें 100 मवेशियों को अलग-अलग रखने के साथ ही बछड़ों के लिए अलग से कक्ष हैं। भूसा के लिए बड़ा भंडार गृह है तो करीब 5 एकड़ का अलग से चारागाह भी है।

व्यक्तिगत पशुशेड भी किए जा रहे हैं तैयार
सीईओ डॉ. इच्छित गढ़पाले ने बताया कि बड़ी-बड़ी गौशाला बनाने के साथ ही लोगों के व्यक्तिगत पशु शेड भी मनरेगा के तहत बनवाए जा रहे हैं। उद्देश्य यही है कि पशुपालन को लाभ का धंधा बनाकर लोग घरों में ही गाय,भैंस बछड़ों को पालें और गांव में भी सड़कों पर या खुले में उन्हें न छोड़े। इसका निर्माण इस तरह से किया जा रहा है कि गोबर व गोमूत्र को अलग-अलग एकत्र किया जा सकेगा।



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