मोतीलाल वोरा का राजनीतिक सफर 1960 के दशक में शुरू हुआ था.(फाइल फोटो)
Motilal Vora Demise: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके 93 साल के मोतीलाल वोरा अक्टूबर में कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे. वोरा को पीएम नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने श्रद्धांजलि दे देते हुए कभी न भूलने वाला नेता करार दिया है.
- News18Hindi
- Last Updated:
December 21, 2020, 5:53 PM IST
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके निधन पर दुख प्रकट करते हुए ट्वीट किया, ‘वोरा जी एक सच्चे कांग्रेसी और बेहतरीन इंसान थे. हमें उनकी कमी बहुत महसूस होगी. उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरा स्नेह एवं संवेदना है.’
मोतीलाल वोरा पुराने दिग्गज राजनीतिकों में शुमार किए जाते रहे और 50 सालों से कांग्रेस के साथ संगठन और सरकारों में जुड़े रहे हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके वोरा का राजनीतिक सफर 1960 के दशक में शुरू हुआ था और शुरुआत में वोरा समाजवादी विचारधारा वाली पार्टी के साथ जुड़े थे, लेकिन उसके बाद 1970 में कांग्रेस में आए और कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार में उच्च पदों पर रहने के बाद राज्यसभा तक भी पहुंचे. वोरा विवादों में भी फंसे लेकिन कुछ कारणों से गांधी परिवार के चहेतों में शुमार रहे.
Congress leader Rahul Gandhi condoles the passing away of party leader Moti Lal Vohra.
“Vora ji was a true congressman and a wonderful human being,” tweets Rahul Gandhi. https://t.co/xpSpO5VhUi pic.twitter.com/OHt0VWFLm6— ANI (@ANI) December 21, 2020
प्रभात तिवारी और पंडित किशोरीलाल शुक्ला की मदद से 1970 में वोरा कांग्रेस में शामिल हुए थे. उसके एक दशक के भीतर ही वो गांधी परिवार के काफी करीब आ गए थे. उनकी कुशलता और एक दशक में मध्य प्रदेश में तीन बार चुनाव जीतना खास कारण थे. 1983 में इंदिरा गांधी सरकार में वोरा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में वोरा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला. इसके बाद राजीव गांधी सरकार में भी वोरा शामिल हुए, जब राज्यसभा के सदस्य के तौर पर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था.
PM Narendra Modi condoles the death of senior Congress leader Moti Lal Vohra.
“Motilal Vora Ji was among the senior-most Congress leaders, who had vast administrative and organisational experience in a political career that spanned decades”, tweets PMO quoting PM Modi https://t.co/xpSpO5VhUi pic.twitter.com/HiVwyhL9eV— ANI (@ANI) December 21, 2020
राहुल गांधी का समर्थन
दो चुनाव पहले जब कांग्रेस प्रधानमंत्री पद के लिए चेहरे की तलाश में थी, तब वोरा ने खुलकर पार्टी के भीतर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की वकालत की थी. वोरा उन गिने चुने नेताओं में से थे, जिन्होंने राहुल को पार्टी की कमान पूरी तरह सौंपे जाने का समर्थन किया था. गांधी परिवार के साथ उनके समीकरण हमेशा सधे रहे और इसी का मुज़ाहिरा था कि वोरा हर बार राहुल के समर्थन में थे, हालांकि पार्टी ने मनमोहन सिंह को ही दो बार प्रधानमंत्री बनाया.
नेशनल हेराल्ड केस से नाता
मोतीलाल वोरा कांग्रेस के एक खास नेता इस मायने में भी रहे हैं कि नेशनल हेराल्ड केस में जिन तीन संस्थाओं का नाम आया, उन तीनों में ही वोरा महत्वपूर्ण पदों पर रहे. एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड यानी एजेएल में 22 मार्च 2002 को वोरा चेयरमैन और एमडी बने थे. नेशनल हेराल्ड केस में आरोपी के तौर पर शामिल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में वोरा कोषाध्यक्ष का पद संभाल चुके थे और इस केस में तीसरी संस्था यंग इंडियन का नाम आया था, इसमें भी वोरा 12 फीसदी के शेयर होल्डर रहे.
और कुछ खास बातें
मोतीलाल वोरा राजनीति में आने से पहले पत्रकार थे. राजस्थान के जोधपुर में ब्रिटिश इंडिया के जमाने में जन्मे वोरा ने छत्तीसगढ़ के रायपुर और कलकत्ता से उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद कई अखबारों के साथ काम किया था. इसके अलावा, वोरा सामाजिक कामों में भी हमेशा आगे रहे थे. इसके बाद वह सक्रिय राजनीति में आए और अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री रहने के अलावा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे. वोरा के बेटे अरुण वोरा भी राजनीति में हैं और छत्तीसगढ़ के दुर्ग से तीन बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं.