कोरोना से बचने वाले बुजुर्गों की कहानी: भोपाल के तीन वृद्धाश्रम, 147 बुजुर्ग; कोरोना किसी को छू न सका, क्योंकि कोविड नियमों का पालन किया

कोरोना से बचने वाले बुजुर्गों की कहानी: भोपाल के तीन वृद्धाश्रम, 147 बुजुर्ग; कोरोना किसी को छू न सका, क्योंकि कोविड नियमों का पालन किया


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भोपाल7 मिनट पहलेलेखक: वंदना श्रोती

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सभी बुजुर्गों की कई बार कोरोना जांच भी हुई, लेकिन इन सबकी रिपोर्ट निगेटिव ही आई।

आसरा, आनंदधाम और अपना घर… शहर के इन तीन वृद्धाश्रमों में 147 बुजुर्ग रहते हैं। इनकी चर्चा इसलिए भी कि यहां सभी बुजुर्ग कोरोना संक्रमण से दूर हैं। कई बार कोरोना जांच भी हुई, लेकिन इन सबकी रिपोर्ट निगेटिव ही आई। वजह सिर्फ एक- वृद्धाश्रम संचालकों ने सख्ती से कोविड गाइडलाइन का पालन किया, इसलिए कोरोना ने भी उनसे दूरी बनाकर रखी।

इन आश्रमों में 99 साल तक के बुजुर्ग हैं। जिनमें से कई शुगर, बीपी, अस्थमा समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी इन वृद्धाश्रमों ने जिस तरह बुजुर्गों को संक्रमण से बचाया है, वो नियमों के पालन की एक मिसाल है।

इन नियमों का कर रहे पालन

  • हर तीसरे दिन आश्रम को करते हैं सैनिटाइज
  • नए बुजुर्गों को प्रवेश नहीं
  • आश्रम में भी डिस्टेंसिंग का ख्याल
  • बाहरी व्यक्ति को बुजुर्गों से नहीं मिलने दिया जाता
  • बुजुर्गों के कमरों में कर्मचारी नहाकर जाते हैं
  • रिश्तेदारों से वीडियो कॉल या फोन से कराते हैं बातचीत
  • महीने में दो बार होती है कोरोना की जांच

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक: शहर में 60 साल से ज्यादा उम्र के 1725 बुजुर्ग बीते 9 महीने में संक्रमित हो चुके हैं, वहीं 85 की माैत हो चुकी है।

आसरा : 7 जांच, हर बार बुजुर्गों की जीत

शाहजहांनाबाद स्थित इस वृद्धाश्रम में 97 बुजुर्ग हैं। 43 महिलाएं और 54 पुरुष हैं। यहां के सचिव दयाराम नामदेव ने बताया कि सबसे अधिक उम्र डोंगर सिंह (98) और बसंत कुलकर्णी (99) की है। कर्मचारियों और बुजुर्गों के लिए नियम सख्त हैं। बुजुर्गों की अब तक 7 बार कोरोना की जांच हो चुकी है, लेकिन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

आनंद धाम : खुद रख रहे सोशल डिस्टेंसिंग

लिंक रोड नंबर-2 स्थित इस वृद्धाश्रम में 26 बुजुर्ग रहते हैं। 14 पुरुष और 12 महिलाएं हैं। यहां के सचिव आरआर सुरंगे ने बताया कि बुजुर्ग खुद सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हैं। ये सभी लोग केवल खाना खाने ही कमरे से बाहर आते हैं। बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। सभी कर्मचारी आश्रम में ही रहते हैं।

एक या दो व्यक्ति जो बाहर किराना, दवाई या अन्य सामान लेने जाते हैं, उन्हें वापस आकर गरम पानी से नहाना होता है। यहां पर जो भी व्यक्ति किराना, सब्जी दान देता है, वह सामान तीन दिन तक अन्य कमरे में रखने के बाद सैनिटाइज कर ही उपयोग में लिया जाता है। रिश्तेदार केवल वीडियाे कॉल या फोन से उनसे संपर्क में रहते हैं। यहां पर सबसे अधिक उम्र के बुजुर्ग एसएस विजयवर्गीय हैं। उनकी उम्र 97 साल है, उन्हें शुगर है। महिलाओं में प्रेमा मल्होत्रा सबसे बुजुर्ग हैं। इनकी उम्र 87 वर्ष है और वे हार्ट पेशेंट हैं।

अपना घर : बाहरी व्यक्ति से मिलने पर पाबंदी, सर्दी-जुकाम भी हुआ तो कोरोना टेस्ट

इस वृद्धाश्रम में 24 बुजुर्ग हैं। इसमें 11 महिलाएं और 13 पुरुष हैं। इसमें सबसे अधिक बुजुर्ग रुक्मणी अग्रवाल हैं। इनकी उम्र 94 साल है। वहीं दो अन्य बुजुर्ग हैं, जिनके घुटनों का ऑपरेशन हुआ है। बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाता है। आश्रम की प्रबंधक माधुरी मिश्रा ने कहा यहां सभी मास्क जरूर पहनते हैं। यदि किसी बुजुर्ग को जुकाम भी होता है तो पहले उसका कोरोना टेस्ट कराते हैं। उनका कहना है कि अभी तक सभी बुजुर्ग संक्रमण से बचे हुए हैं।



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