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- Two Rooms Were Built In A Government School In Ujjain By Spending Seven Lakhs In Memory Of Teacher Husband
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उज्जैन43 मिनट पहले
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शिक्षक पति की स्मृति में चंदाबाई ने सात लाख खर्च सरकारी स्कूल में दो कक्ष बनवाए
- 10 साल से कर रहीं थी पेंशन निधि से बचत
- बेटों ने भी दिया मां का साथ
पेशे से शिक्षक रहे स्व. भवानी सिंह मंडलोई के लिए इससे बड़ी सच्ची श्रद्धांजलि और क्या हो सकती है कि उनकी याद में 80 साल की पत्नी चंदाबाई ने पेंशन से पाई-पाई बटोरकर उज्जैन के शासकीय उमा विद्यालय फाजलपुरा में दो कमरे बनवा दिए। मां के इस संकल्प को पूरा करने में बेटों ने भी पूरा साथ दिया। गुरुवार को जब दोनों कमरे विद्यालय को समर्पित किए गए तो सांसद और विधायक भी इसके साक्षी बने। कमरों के शिलान्यास पट में पति का नाम हमेशा के लिए अंकित हो गया।
कमरे बनवाने के लिए ऐसे बना विचार
राम सिंह मंडलोई बताते हैं कि जब हम तीनों भाइयों को नौकरी मिल गई तो परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई। मां को मिलने वाली पेंशन की बचत होने लगी। उसके बाद मां ने कहा कि गांव में ही मंदिर के पास तुम्हारे पिता की स्मृति में कमरे बनवा दिए जाएं। इस पर परिवार में मंथन चल ही रहा था कि मेरे मन में विचार आया कि अगर कमरे ही बनवाने हैं तो क्यों न स्कूल में कमरे बनवाए जाएं। इससे स्कूल को कमरे मिल जाएंगे और बच्चों को पढ़ाई में सुविधा हो जाएगी। इस मत से मेरे दोनों अन्य भाई और परिवार के लोग सहमत हो गए। इसके बाद ही फाजलपुरा के शासकीय उमा विद्यालय (इसी विद्यालय में रामसिंह शिक्षक हैं) में कमरे बनवाने का काम शुरू हो गया। 10 साल की पेंशन बचाकर मां ने सात लाख रुपए जमा किए थे। इसी पैसे से दो कमरे तैयार हो गए। गुरुवार को दोनों कमरों को विद्यालय को समर्पित कर दिया गया। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया और विधायक व पूर्व मंत्री पारस जैन भी थे।

कार्यक्रम को सांसद अनिल फिरोजिया ने संबाेधित किया
बेटों को अच्छी तालीम के लिए मां ने मजदूरी भी की
राजगढ़ जिले के माचलपुर निवासी भवानी सिंह मंडलोई पेशे से उज्जैन में सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। वर्ष 1980 में उनका देहान्त हो गया। पति के गुजर जाने के बाद पत्नी चंदाबाई अपने तीन बेटों राम सिंह मंडलोई, राय सिंह मंडलोई और अशोक सिंह मंडलोई के साथ जीवन के संघंर्षों से जूझ रहीं थीं। उस जमाने में 60 रुपए पेंशन मिलती थी। इतने कम पैसों में घर का खर्च चलाना मुश्किल था। बेटों को अच्छी परवरिश के साथ-साथ पढ़ाई भी जारी रहे, इसी जद्दोजहद में चंदाबाई मजदूरी भी करने से नहीं परहेज करती थीं। उस समय मिलने वाली मजदूरी के दो रुपए भी घर का खर्च चलाने में बड़े मददगार साबित होते। जीवन में उतार-चढ़ाव से जूझते हुए तीन बेटे बड़े हो गए और पिता स्व. भवानी सिंह की तरह वे भी शिक्षक बन गए। वर्तमान में रायसिंह इंदौर में निजी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। अशोक भी शिक्षक हैं। राम सिंह मंडलोई उज्जैन के शासकीय उमा विद्यालय फाजलपुरा में शिक्षक हैं।