इंदौर में ब्रिटेन से आए लोगों की जांच रिपोर्ट देर से आई. (फाइल फोटो)
ब्रिटेन से इंदौर आए लोगों की जिस कोरोना रिपोर्ट को 11 घंटे में आ जाना चाहिए था, वह 36 घंटे में आई. दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के पास सिस्टम ही नहीं है टेस्टिंग का. उसका कहना है कि कई सैंपलों की जांच एक साथ होती है, इसलिए ये पता लगाना मुश्किल है कि कौन सा सैंपल कहां का है.
- News18Hindi
- Last Updated:
December 25, 2020, 7:27 AM IST
ब्रिटेन में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन पर शहर का स्वास्थ्य विभाग कितना चिंतित है इस बात का पता इसी बात से लग जाता है कि बुधवार को ब्रिटेन से आए 30 लोगों के सैंपल लिए गए थे. इन सैंपल की विशेष जांच करने के बजाए इन्हें एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया. इस वजह से जो जांच 11 घंटे में पूरी हो सकती थी, वह 36 घंटे में हुई.
पता लगाना मुश्किल कौन से ब्रिटेन के हैं
इस बेफिक्री को लेकर एमजीएम प्रबंधन का कहना है कि कोरोना के किसी एक विशेष सैंपल की जांच अलग से नहीं होती. जांच कई सैंपलों की एक साथ होती है, ऐसे में पता नहीं लगता कि ब्रिटेन से आए लोगों के सैंपल कौन से हैं. गौरतलब है कि कोरोना के नए स्ट्रेन का पता लगने के बाद इंदौर सहित पूरे प्रदेश में ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों की निगरानी शुरू कर दी गई है. भोपाल से इंदौर के स्वास्थ्य अधिकारियों को अब तक सौ से ज्यादा यात्रियों की सूची मिल चुकी है.घर के बाहर नहीं लिख सकते कि ये ब्रिटेन से आए हैं
प्रशासन ने ब्रिटेन से आए सभी लोगों को 14 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इनकी निगरानी के लिए अलग से कोई सिस्टम नहीं बनाया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि घर के बाहर कोई नोटिस चस्पा नहीं कर सकते कि यह ब्रिटेन से आए हैं. ऐसा करने पर आसपास रहने वालों में भय का वातावरण बन सकता है. सुप्रीम कोर्ट की भी गाइडलाइन है कि इससे व्यक्ति के सामाजिक जीवन पर असर पड़ता है. इसलिए उसकी पहचान हो, ऐसा कोई नोटिस नहीं लगाए.