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- Inquiry Completed From Jabalpur To Noida, Officers With Special Numbers Will Be In Touch With Recovery Gang, Will Submit Report On Sunday
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जबलपुर4 घंटे पहले
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रिश्वत में गिरफ्तार पुलिस कर्मी व पिस्टल लूटकांड के आरोपी (फाइल फोटो)
- नोएडा में फ्रॉड को धमका कर 28.70 लाख रुपए वसूली मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य जांच अधिकारी के हाथ लगे
एमपी पुलिस की नाेएडा में किरकिरी कराने वाली साइबर की वसूली गैंग और उन्हें शह देकर वहां भेजने वाले पुलिस कर्मियों व अधिकारियों की पूरी कुंडली तैयार हो गई है। जांच अधिकारी आईपीएस गुरुकरन सिंह ने जबलपुर व नोएडा में चार दिन रहकर 28.70 लाख रुपए रिश्वत के मामले काे पूरी तरह खंगाल डाला। जांच में सामने आया कि वसूली गैंग से जबलपुर में बैठे अधिकारी स्पेशल नंबर से लगातार संपर्क में थे। हर मूवमेंट पर उन्हें दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे। जांच अधिकारी गुरुकरन रविवार को अपनी रिपोर्ट स्टेट साइबर सेल के एडीजी ए साईं मनोहर को सौंप देंगे।
सीडीआर में फंस गए अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक नोएडा पुलिस द्वारा रिश्वत कांड में गिरफ्तार एसआई पंकज साहू, राशिद परवेज खान व आरक्षक आसिफ और पिस्टल लूट कांड में गिरफ्तार सूर्यभान यादव व शशिकांत यादव से जांच अधिकारी गुरुकरन ने लंबी पूछताछ की। एक-एक से अलग-अलग पूछताछ में ढेर सारी ऐसी बातें सामने आई, जो ये साबित करती है कि इस रिश्वत कांड में जबलपुर में बैठे अधिकारियों के साथ तीनाें की अहम भूमिका थी। जांच अधिकारी गुरुकरन सिंह ने तीनों पुलिसकर्मियों का पिछले तीन महीने का सीडीआर निकलवाया। उसमें एक तथ्य ये सामने आया कि आरोपियों से अधिकारी स्पेशल नंबर से जुड़े थे।
करनाल से हिस्सा लेने महिला एसआई पहुंच गई नोएडा
जांच में एक तथ्य ये भी सामने आया कि फ्रॉड के एक दूसरे मामले की जांच करने करनाल गई महिला एसआई व एक आरक्षक नोएडा पहुंच गईं। इस रिश्वत कांड में तीन लाख रुपए उनका हिस्सा तय हुआ था। पंकज साहू के साथ वसूली गैंग में शामिल इस महिला एसआई के कारनामें एक-एक कर सामने आने लगे हैं। 25 दिन पहले साइबर सेल की इस वसूली गैंग ने कटनी के एक व्यापारी के बेटे को पोर्नोग्राफी केस में फंसाने की धमकी देकर आठ लाख रुपए वसूले थे। इस महिला एसआई के बयान जांच में सहयोगी ट्रेनी आईपीएस प्रियंका शुक्ला ने दर्ज किया था।

जबलपुर में हुई पूछताछ की फाइल फोटो
नोएडा पुलिस की जांच में मिले तथ्यों को भी शामिल किया
जांच अधिकारी आईपीएस गुरुकरन सिंह ने नोएडा की सेक्टर 20 थाना पहुंच कर वहां के विवेचक से भी इस केस से जुड़े सारे पहलू की जानकारी ली। मामले में जब्त दस्तावेजों की एक प्रति भी ली। वहीं रिश्वत कांड से जुड़े हर पात्र व घटनास्थल का भी जायजा लिया। जांच अधिकारी को दो दिन की जबलपुर में की गई जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य हाथ आ गए। सबसे अहम बयान चंद्रकेतु का रहा। उसने साफ कर दिया था कि वह मोहरा भर था। अधिकारी जैसा बोलते गए वो करता गया। उसे महज इतना बताया गया था कि जालसाज से उसकी रकम सहित ठगे गए अन्य लोगों की रकम उसके खाते में ट्रांसफर किए गए हैं।
मुख्यालय अटैच दोनों अधिकारी रिलीव
रिश्वत कांड के बाद गृह विभाग द्वारा एसपी साइबर सेल जबलपुर जोन अंकित शुक्ला व टीआई हरिओम दीक्षित को मुख्यालय अटैच करने का आदेश जारी हुआ था। प्रारंभिक जांच तक दोनों अधिकारियों को जबलपुर में रुकने के लिए कहा गया था। दोनों अधिकारियों को जबलपुर से रिलीव कर दिया गया है। अभी टीआई विपिन ताम्रकार को जबलपुर यूनिट का चार्ज सौंपा गया है। सूत्रों की मानें तो दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सोमवार को सख्त कार्रवाई हो सकती है।
ये थी पूरी घटना
15 दिसंबर को एसआई पंकज साहू, राशिद परवेज खान व आरक्षक आसिफ अली दिल्ली रवाना हुए थे। टीम को 2018 में दर्ज मैट्रिमोनियल साइट से हुई ठगी मामले में दो गिरफ्तारी शेष रहने के प्रकरण में दिल्ली जाने की अनुमति ली थी। तीनों पुलिस कर्मी दिल्ली न जाकर नोएडा पहुंचे और 54 हजार की ठगी मामले की चंद्रकेतु दुबे द्वारा की गई शिकायत के आरोपी सूर्यभान यादव से वसूली करने में जुट गए।

जबलपुर स्टेट साइबर सेल
इस तरह धमका कर रकम वसूली
पहले उससे बिट क्वाइन में 24 लाख, 1.70 लाख चंद्रकेतु के खाते में ट्रांसफर कराए। तीन लाख रुपए नकद लिए गए। सेक्टर 18 में स्थित उसके निजी बैंक खाते से लेन-देन की रोक हटाकर उसमें जमा 58 लाख रुपए में से 50 लाख लेने का दबाव डाल रहे थे। इससे पहले 18 दिसंबर को सूर्यभान ने अपने साथी की मदद से पिस्टल लूट की वारदात को अंजाम दिलवा दिया और इस पूरे प्रकरण का भंडाफोड़ हो गया।
मेरी रिपोर्ट तैयार, कल सौंपा दूंगा-सिंह
रिश्वत कांड में प्राथमिक जांच अधिकारी बनाए गए एसपी साइबर सेल भोपाल गुरुकरन सिंह के मुताबिक उनकी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। रविवार को वह एडीजी को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे। इस पूरे प्रकरण में कई तरह की जानबूझकर गलतियां की गई हैं। दस्तावेजों व बयानों से साफ हो चुका है कि तीनों पुलिस कर्मियों व जबलपुर में बैठे अधिकारियों की पूरी जानकारी में ये सब हुआ। महिला एसआई की भूमिका का भी उल्लेख है। आगे की कार्रवाई संबंधी निर्णय एडीजी और गृह विभाग करेगा।