खेती में उम्मीद…: किसानों को बनाएंगे उद्यमी, मशीन देकर उनके खेत के खोड़ों से निकलवाएंगे रेशे

खेती में उम्मीद…: किसानों को बनाएंगे उद्यमी, मशीन देकर उनके खेत के खोड़ों से निकलवाएंगे रेशे


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बुरहानपुर11 घंटे पहले

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  • आत्मनिर्भर योजना में ‘केला’

आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत नए साल में बुरहानपुर केले का बड़ा हब बनकर उभर सकता है। इसमें केला उत्पादक किसानों को उद्यमी बनाया जाएगा। उन्हें मशीनें उपलब्ध कराकर केले के खोड़ से रेशे निकलवाए जाएंगे। इसे कॉटन मिक्स कपड़ा व सेनिटरी नैपकिन आदि वस्तुएं बनाने के लिए दक्षिण भारत में बेचेंगे। आत्मनिर्भर योजना में बुरहानपुर की प्रमुख केला फसल को शामिल किया है। इसके विभिन्न उद्योगों की संभावनाएं खोजने के लिए दिल्ली-भोपाल से दल आया था। उन्होंने केले के खोड़ से रेशे निकालने के उद्योग शुरू करने की संभावना जताई। किसानों को सरकारी मदद से मशीनें उपलब्ध कराने पर चर्चा की। बड़ी मात्रा में केले का रेशा निकालकर देश-विदेश में निर्यात करने की योजना पर काम चल रहा है। अभी जिले में 20 हजार हेक्टेयर में केला फसल लगती है। 8 से 10 करोड़ खोड़ निकलते हैं। लुंगर काटने के बाद किसान इन खोड़ों को फेंक देते हैं। देशभर में 100 में से 2-3 कंपनियां ही काम कर पा रही हैं। मप्र में बुरहानपुर के जैनाबाद क्षेत्र में एक फायबर कंपनी संचालित है। मेहुल श्राफ कहते हैं हमारी यूनिट से सालभर में 12 टन से ज्यादा फायबर दक्षिण भारत में निर्यात कर रहे हैं। बुरहानपुर से अधिकांश फायबर दक्षिण भारत में जा रहा है। इसमें कोयम्बटूर, श्रीची, कुन्नूर, अन्नूर, इरोड़ व गुजरात के सूरत आदि में फायबर की डिमांड है। वर्तमान में केले के खोड़ का रेशा 170 रुपए किलो के भाव से बिक रहा है। रेशे के दाम में उतार-चढ़ाव होता रहता है।

01 खोड़ में करीब 30 किलो रेशा होता है। 01 खोड़ से 200 ग्राम रेशा निकलता है। 01 खोड़ से 2 से 2.25% रेशा काम आता है।



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