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ग्वालियर4 मिनट पहले
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डबरा थाना के बाहर खड़े मृतक बच्चों के परिजन व स्थानीय नागरिक
- -गिजोर्रा में धमन का गुंझार गांव की घटना
- मासूम ईंट भट्टे पर मां-पिता के साथ आए थे
सोमवार सुबह दो मासूम भाई किसी की लापरवाही के कारण हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए। मासूम का परिवार ईंट भट्टे पर मजदूरी करने के लिए गिजोर्रा के धमन का गुंझार गांव में आया था। यहां सोमवार सुबह दोनों भाई ईंट भट्टे के पास ही खेत में बाथरूम करने जा रहे थे। तभी खेत में खुले पड़े बिजली के तार पर दोनों का पैर पड़ा और झुलसकर वह वहीं गिर पड़े। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई है। घटना के बाद से स्थानीय लोग और परिजन आक्रोशित हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों मासूम को निगरानी में लेकर अस्पताल पहुंचाया। मौत की पुष्टि होने के बाद डबरा में उनका पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव मिलते ही परिजन डबरा थाना पहुंचे और हंगामा किया। पुलिस ने खेत मालिक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है तब जाकर परिजन माने हैं।
डबरा के खेरोना घाट निवासी राम मिलन केवट मजदूर है। वह ईंट भट्टे पर काम करते हैं। अभी कुछ दिन से वह धमन का गुंझार में ईंट भट्टे पर काम करने आए थे। साथ में उनके दो बच्चे 8 वर्षीय गणेश और 4 वर्षीय मनीष उर्फ कृष्णा साथ में थे। सोमवार सुबह राम मिलन और उनकी पत्नी ईंट भट्टे पर काम कर रहे थे। तभी दोनों भाई एक दूसरे का हाथ पकड़कर बाथरूम करने के लिए पास ही खेत में चले गए। इतनी ठंड होने के बाद भी वह पैर में कुछ नहीं पहने थे। अभी वह कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि खेत में पड़ा बिजली का तार उन्हें नहीं दिखा। तार पर पैर पड़ते ही दोनों मासूम की चीख निकली और वह करंट से झुलस गए। मौके पर ही उनकी मौत हो चुकी थी, लेकिन पुलिस ने घटना की सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचकर बच्चों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
डबरा थाना पर किया हंगामा, जाम
डबरा में दोनों बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। इसके बाद शव परिजन के सुपुर्द कर दिए गए। शव मिलने के बाद परिजन व स्थानीय लोगों ने डबरा थाना पहुंचकर हंगामा कर दिया। परिजन व स्थानीय लोगों की मांग थी कि खेत मालिक पर मामला दर्ज किया जाए। पुलिस ने आश्वासन दिया है मर्ग कायम कर लिया गया है। उसकी जांच पर जल्द खेत मालिक पर लापरवाही से तार खुला छोड़ने पर मामला दर्ज किया जाएगा।
यही थे राम मिलन के बुढ़ापे का सहारा
गणेश और कृष्णा ही राम मिलन के बुढ़ापे का सहारा था। उसके दो ही बच्चे थे यह दोनों पर उसे बहुत आशा थी। इनको वह पढ़ा लिखाकर अच्छा इंसान बनाना चाहता था। उसका लोगों से कहना था कि वह मजदूरी कर रहा है, लेकिन उसके बच्चे एक दिन ऐसा काम कर जाएंगे कि लोग याद रखेंगे। पर उसे नहीं पता था कि वह दोनों इस तरह छोड़कर चले जाएंगे