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श्योपुर4 दिन पहले
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- मकर संक्रांति सुबह 7.47 बजे सूर्य मकर राशि में करेंगे प्रवेश, रात्रि 11.47 बजे तक पुण्यकाल
मकर सक्रांति पर्व 14 जनवरी गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 7.47 बजे सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर सक्रांति का पुण्यकाल सुबह 7.47 से रात्रि 11.47 बजे तक रहेगा। ज्यतिषियों के अनुसार यह सक्रांति पश्चिम दिशा से आ रही है। इस बार सूर्य के राशि बदलते ही मकर राशि में सूर्य के साथ चंद्रमा, बुध, गुरु और शनि होने से पंचग्रही योग बनेगा। ग्रहों की यह युति बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलाव लाने का ज्योतिषीय संकेत दे रही है।
ज्योतिषाचार्य पं. अश्विनी शर्मा ने बताया कि आग्नेय कोण को देखते हुए पूरब दिशा में जा रही है। जिन वस्तुओं को मकर सक्रांति उपयोग में ले रही हैं, वे वस्तुएं महंगी होने की संभावनाएं रहेगी। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका रहेगी। अनाज का भाव सम स्थिर रहेगा। सोना चांदी, सूत कपास, कंद मूल पदार्थ, चावल, सुगंधित पदार्थ, सफेद रंग की वस्तुएं, साबूदाना आदि में तेजी रहेगी। आग्नेय दिशा को देखने व पूरब दिशा में जाने के कारण इन दिशाओं के राष्ट्रों, प्रदेशों के लिए कष्टप्रद रहेगी। इसका राशियों पर भी अलग-अलग असर होगा।
संक्रांति का राशियों पर शुभ-अशुभ फल
मेष, कर्क, वृश्चिक राशि के जातकों के लिए तांबा का पाया होने से श्रेष्ठ फलदायी है। वृष, कन्या, धनु राशि के जातकों के लिए चांदी का पाया होने से सर्वश्रेष्ठ फलदायक है। मिथुन, तुला, कुंभ राशि वालों के लोहा का पाया होने के कारण मध्यम फलदायक है। सिंह, मकर और मीन राशि के जातकों के लिए सोना का पाया होने के कारण अशुभ फलदायक रहेगी
12 राशियों पर ये असर
मेष- सुखदायक, वृष-धर्म में कमी, मिथुन-कष्टदायक, कर्क- पीड़ाकारक, सिंह- शत्रुनाश, कन्या- कष्टदायक, तुला- हानिकारक, वृश्चिक- धन लाभ, धनु- राजभय, मकर- चिंता, कुंभ- पीड़ा, मीन-धन लाभ।
शांति के यह उपाय
गाय को घास, पक्षियों और मछलियों को दाना, गरीबों को भोजन, तिल के व्यंजन खिलाने, ऊनी वस्त्र दान करने और निर्धनों, जरूरतमंदों के बीच सेवाकार्य करने से मकर सक्रांति के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।
जानिएः मकर संक्रांति की पूजा विधि
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर नदी में स्नान करना जरूरी होता है। नहाकर साफ वस्त्र पहनने होते हैं।
- एक साफ चौकी लेकर उस पर गंगाजल छिड़कें व लाल वस्त्र बिछाएं।
- सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करें।
- चौकी पर लाल चंदन से अष्टदल कमल बनाएं।
- सूर्यदेव का चित्र या तस्वीर चौकी पर स्थापित करें।
- सूर्यदेव को तिल और गुड़ से बने हुए लड्डुओं का भोग लगाएं।