अब सीरीज 1-1 की बराबरी पर खड़ी है. आखिरी और निर्णायक टेस्ट 15 जनवरी से खेला जाने वाला है. भारतीय हौसले बुलंद हो गए हैं. दुनिया भर के क्रिकेटप्रेमियों की नजर इस आखिरी टेस्ट पर गड़ी हुई है. कंगारुओं को उनके घर में एक बार फिर हराने का हसीन मौका आ गया है. मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था कि बल्लेबाजी के हिसाब से क्रिकेट इतिहास की यह सबसे कमजोर ऑस्ट्रेलियाई टीम है. उनकी टीम स्टीव स्मिथ और लबुशेन पर बुरी तरह टिकी हुई है. ये जल्दी गए कि टीम गई. इस कमजोरी का भारत को फायदा उठाना चाहिए. अब तीसरे टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद तो यह कहा जा सकता है कि क्षेत्ररक्षण की दृष्टि से भी यह ऑस्ट्रेलियाई टीम उनके क्रिकेट इतिहास की सबसे कमजोर टीम है.
कोई भी टीम प्रेरित होती है, अपने कप्तान के प्रेरणादायक प्रदर्शन से, लेकिन टिम पेन न ठीक बल्लेबाज हैं और न ही सुलझे हुए विकेटकीपर. प्रभावशाली कप्तान तो वह कतई नहीं हैं. वास्तव में देखा जाए तो उनके दयनीय प्रदर्शन के बाद तो उनकी जगह टीम में ही नहीं बनती है. तीसरे टेस्ट मैच की दूसरी भारतीय पारी में 5 कैच तो अकेले टिम पेन ने ही टपकाए. ऐसा कप्तान और ऐसा विकेटकीपर अपने अन्य खिलाड़ियों को क्या मुंह दिखाएगा. प्रेरणा देने की बात तो बहुत दूर की है.
एक बात और. ऑस्ट्रेलिया ने उस भारतीय टीम के सामने घुटने टेके हैं, जिसके करीब आधे खिलाड़ी चोटिल हैं. ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन चोटिल हैं. चोट इतनी गहरी हैं कि जडेजा और विहारी सीरीज से ही बाहर हो चुके हैं. पंत का अगला मैच खेलना तय नहीं है. इसके बावजूद अगर ऑस्ट्रेलिया सिडनी टेस्ट नहीं जीत पाया तो यही कह सकते हैं कि आधी टीम इंडिया चोटिल है, लेकिन दर्द ऑस्ट्रेलिया को हो रहा होगा.
सिडनी के तीसरे टेस्ट मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों को काफी नस्लीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ा. दर्शकों का एक झुंड जसप्रीत बुमराह और सिराज को भूरा कुत्ता ‘ब्राउन डॉग’ कहकर चिढ़ा रहा था. भारतीय खिलाड़ियों ने इस पर एतराज जताया और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया भी एकदम हरकत में आ गया. कुछ दर्शकों को तुरंत मैदान से बाहर निकाल दिया गया और भारत को आश्वस्त किया कि ऐसी हरकत कदापि बर्दाश्त नहीं की जाएगी. विराट कोहली ने भी इस घटना की घोर निंदा करते हुए इसे असहनीय बताया. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भी घटना को गंभीरता से लिया. नस्लीय टिप्पणियां मानव जाति पर कलंक के समान हैं.
ऑस्ट्रेलिया का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है कि इस तरह की भावनाएं पीढ़ियों तक भी छोड़ी नहीं जा सकी हैं. जब कैप्टन कुक ने ऑस्ट्रेलिया की खोज की थी और अंग्रेजों द्वारा कैद किए गए दुनिया भर के अपराधियों और कैदियों को वहां बसाया था, तब उन बसाए गए लोगों ने सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों (Aboriginal) को ही जंगल में खदेड़ दिया था. अपने आप को बेहतर नस्ल समझ कर कालों को ओछी दृष्टि से देखने की आदत उनके अंतर्मन में कहीं न कहीं आज भी कायम है.
यह तो अच्छी बात है कि भारत की ताकत का आज दुनिया लोहा मानती है और भारत से संबंध बनाए रखने में गर्व महसूस करती है. यही कारण है कि इस समस्या का तुरंत समाधान निकालने की चेष्टा की गई है. पुराना जमाना होता तो बात आई-गई हो जाती. भारत क्रिकेट में ताकत और पैसों के हिसाब से भी आज विश्व की प्रमुख शक्ति बना हुआ है. भारत को नाराज कोई भी नहीं करना चाहता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का रुतबा और प्रभाव भी अंतराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद पर पर्याप्त है. इसी कारण मामले को रफा-दफा करने के बजाए उसका भारत के हित में हल निकालने की कोशिश की गई है. पैसा आदमी को चलाता है और उसके व्यवहार को अदलता-बदलता रहता है.हमारे सोशल मीडिया की जमात और बुद्धिमान समालोचक चेतेश्वर पुजारा और ऋषभ पंत के चिथड़े उड़ा रही थे. अब जमात इनकी तारीफ में प्रशंसा के गीत गा रहे हैं. परिणाम प्रिय होना हम भारतीयों का अंतरंग स्वभाव है. चौथे टेस्ट मैच में मनोविज्ञान की दृष्टि से भारत का पलड़ा भारी रहेगा. लगता है ‘घर में शेर’ कहलाने की शर्मिंदगी से अब छुटकारा मिल जाएगा. (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)
First published: January 11, 2021, 6:35 PM IST



