परिवार के लोगों ने ऐश्वर्या का स्वागत किया.
Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के पास महू की रहने वाली ऐश्वर्या शर्मा ने, उनका चयन भारतीय वायुसेना में हुआ है. देश में पांच लाख प्रतिभागियों में से चयनित 214 में ऐश्वर्या भी शामिल हैं.
- News18Hindi
- Last Updated:
January 28, 2021, 11:14 AM IST
दो साल की ट्रेनिंग के बाद वे वायुसेना की तकनीकी शाखा को बतौर फ्लाइंग ऑफिसर जॉइन करेंगी पिछले साल आयोजित वायुसेना संयुक्त प्रवेश परीक्षा एफकेट में शामिल पांच लाख प्रतिभागियों में से चयनित 214 में ऐश्वर्या शामिल हैं. वे बताती हैं 2019 में ग्रेजुएशन पूरा होने के महज चार माह बाद उनके पिता का देहांत हो गया था. उनकी बहन उस वक्त छोटी थी और मां गृहिणी. इसलिए परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ गई. कैंपस प्लेसमेंट के जरिए इंफोसिस में नौकरी लग गई. इंदौर में कमरा किराए से लेकर जॉब के साथ पढ़ाई भी करती रहीं.
बगैर कोचिंग के की तैयारी
बगैर कोचिंग इंटरनेट की मदद से परीक्षा की तैयारी की और इंटरव्यू के लिए महू के रिटायर्ड सेनाधिकारी से मार्गदर्शन लिया. उनके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा नेवी में पेटी ऑफिसर थे. उनका सपना था कि वो भी सेना में अधिकारी की तरह नौकरी करें. पिता की इसी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए एश्वर्या ने जी तोड़ मेहनत की और तक जाकर उनके पिता का सपना साकार हो पाया. ऐश्वर्या का दूसरी लड़कियों को संदेश देती हैं कि वे अपना गोल सेट करें और उस लक्ष्य के पीछे मेहनत करें तो कामयाबी जरूर मिलेगी.मिलेगा ये जिम्मा
ऐश्वर्या को राफेल समेत सेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, मालवाहक जहाज,हेलिकॉप्टर और दूसरी मशीनों के रखरखाव का जिम्मा उन्हें मिलेगा. बतौर फ्लाइंग ऑफिसर अपना काम संभालने के पहले उन्हें दो साल की ट्रेनिंग से गुजरना होगा. हैदराबाद की एयरफोर्स एकेडमी में छह माह की जनरल ट्रेनिंग के बाद एयरफोर्स टेक्निकल कॉलेज बेंगलुरु में डेढ़ साल का गहन तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा उनकी ट्रेनिग 30 जनवरी से शुरू होगी. ऐश्वर्या की मां का कहना है कि उनकी बेटी देश की सेवा करें अपना ध्यान रखें और देश का भी ध्यान रखें बेटियां किसी पर डिपेंट न रहें. बहरहाल एयरफोर्स में सलेक्शन के लिए उम्मीदवार को पांच दिन तक ग्रुप टास्क, साइकोलॉजिकल टेस्ट व पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर परखा जाता है, लेकिन हौसला बनाए ऱखने से कामयाबी कदम चूमने लगती है ऐश्वर्या शर्मा ने अपना हौसला नहीं खोया और लगातार परिश्रम से आखिरकार अपनी मंजिल पा ली.