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देहरादूनएक मिनट पहलेलेखक: मनमीत
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इस साल कश्मीर में रिकॉर्डतोड़ बर्फबारी के बावजूद उत्तराखंड और हिमाचल के इलाकों में बर्फबारी बहुत कम हुई है।
- बर्फबारी कम होने से इस साल गर्मी में बढ़ेगा ग्लेशियरों पर दबाव
उत्तराखंड के औली में इस साल सीनियर स्कीइंग नेशनल चैंपियनशिप होनी है, मगर एक दिक्कत खड़ी हो गई है। हर साल इस समय बर्फ से ढके रहने वाले औली में बर्फ ही नहीं है। इसके चलते चैंपियनशिप की तिथि घोषित नहीं हो पा रही है। हालांकि मौसम की इस विसंगति का यह सिर्फ छोटा असर है। इस साल कश्मीर में रिकॉर्डतोड़ बर्फबारी के बावजूद उत्तराखंड और हिमाचल के इलाकों में बर्फबारी बहुत कम हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है पश्चिमी विक्षोभ से बने बारिश के बादल इस बार कश्मीर में तो बरसे मगर हिमाचल और उत्तराखंड में बरसने की जगह कजाकिस्तान का रुख कर गए। इसका दूरगामी असर यह होगा कि गर्मी में तापमान औसत से 2 से 3 डिग्री उछाल सकता है।
क्यों दिख रही ये विसंगति
उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह बताते हैं कि हर तीसरे-चौथे दिन भूमध्य सागर से विक्षोभ उठता है, जो बादल बनकर मध्यपूर्व के देशों और पाकिस्तान के ऊपर गुजरते हुए भारत पहुंचता है। भारत पहुंचने के लिए विक्षोभ को काफी नीचे रहना होता था, लेकिन इस बार विक्षोभ हायर एल्टीटयूड में होने से सीधे सेंट्रल एशिया की तरफ मुड़ जा रहे हैं। इसलिए कश्मीर मे तो औसत से ज्यादा बारिश और रिकाॅर्ड हिमपात हो रहा है, लेकिन उत्तराखंड और हिमाचल में औसत से बेहद कम है।
क्या होगा असर
शोध में सामने आया है कि ये हालात अप्रैल तक रहेंगे। इससे ग्लेशियर में कम ‘स्नो’ गिरेगी और नीचे की ‘आइस’ ज्यादा पिघलेगी। जिसके दूरगामी गंभीर परिणाम होंगे। वहीं गर्मियों में हिमालय का औसत तापमान ज्यादा रह सकता है। जिससे तेजी से ग्लेशियर पिघलेंगे और जलधाराओं को जल स्तर भी प्रभावित होगा। वहीं मई और जून मंे सामान्य से तीन डिग्री अधिकतम तापमान और चार डिग्री तक न्यूनतम तापमान रह सकता है।