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- Counting Of Vultures In Madhya Pradesh Starts From Today; In The Year 2019, Their Number Was 8 Thousand 398
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भोपालएक मिनट पहले
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मध्यप्रदेश में आज से गिद्धों की गिनती शुरू हो गई है। सिर्फ बैठे हुए गिद्धों की ही गिनती की जाती है। – प्रतीकात्मक फोटो
- ठंड के अंतिम सप्ताह में गिनती की जाती है
- वर्ष 2018 से यह कार्य शुरू किया गया है
मध्यप्रदेश में गिद्धों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए आज से उनकी गिनती शुरू हो गई है। सूर्योदय से प्रारंभ होकर सोमवार सुबह 3 बजे तक होगा। प्रदेश के सभी 16 वृत्त और 8 संरक्षित क्षेत्रों में गिद्ध गणना कार्य वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, डब्ल्यूडब्ल्यूआई के प्रतिभागियों के अलावा स्वयं-सेवक और फोटोग्राफर द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। गणना के बाद डाटा संकलन का कार्य वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में होगा।
मुख्य वन प्राणी अभिरक्षक एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-प्राणी) आलोक कुमार ने बताया कि प्रदेश-व्यापी गिद्धों की गणना की शुरुआत वर्ष 2018 से की गई थी। इसमें 7 हजार 28 गिद्धों का आंकलन किया गया था। वर्ष 2019 में यह संख्या 8 हजार 398 पाई गई थी। गिद्ध गणना का कार्य दो चरणों में किया जाता है। पहला चरण अक्टूबर-नवंबर माह में और दूसरा चरण जनवरी-फरवरी माह में आयोजित किया जाता है।
प्रदेश में गिद्धों की 7 प्रजातियां हैं
अब तक किए गए सर्वे और अध्ययन में मध्यप्रदेश में कुल 7 प्रजातियों के गिद्ध पाए गए हैं। इनमें से 4 प्रजाति स्थानीय और 3 प्रजाति प्रवासी हैं। यह शीत काल समाप्त होते ही वापस चले जाते हैं।
गणना इस प्रकार की जाती है
गिद्धों की गणना प्रथम चरण में तब की जाती है, जब सभी प्रजाति के गिद्ध घोंसले बनाकर अपने अंडे दे चुके होते हैं या देने की तैयारी में होते हैं। ऐसे में इनकी गणना करने में सुविधा और सटीकता रहती है। इसी प्रकार से फरवरी माह आने तक इन घोंसलों में अंडों से नवजात गिद्ध निकल जाते हैं और वे उड़ने की तैयारी में रहते हैं। इसलिए गिद्धों की गणना करने के लिए शीत ऋतु का अंतिम समय ठीक माना जाता है, ताकि स्थानीय और प्रवासी गिद्धों की समुचित गणना की जा सके।
गणना के दौरान इन बातों का रखा जाता है ख्याल
गणनाकर्मी और स्वयं-सेवक सूर्योदय के तुरंत बाद प्रथम चरण में चयनित गिद्धों के घोंसलों के निकट पहुंच जाते हैं और घोंसलों के आसपास बैठे गिद्धों एवं उनके नवजातों की गणना करते हैं। इसमें इस बात का विशेष ख्याल रखा जाता है कि आवास-स्थलों पर बैठे हुए गिद्धों को ही गणना में लिया जाए। उड़ते गिद्धों को गणना में नहीं लिया जाता। अंतिम चरण में वन विभाग के इस वर्ष कर्मियों के साथ-साथ पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों में पक्षी विशेषज्ञ, छात्र, फोटोग्राफर और स्थानीय नागरिक इस गणना में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।