जानिए IPL ऑक्शन की पूरी प्रक्रिया: कौन-सी टीम कितने खिलाड़ी खरीद सकती है, किसके पास कितना पैसा; क्या है राइट टू मैच और कैप्ड-अनकैप्ड का मतलब

जानिए IPL ऑक्शन की पूरी प्रक्रिया: कौन-सी टीम कितने खिलाड़ी खरीद सकती है, किसके पास कितना पैसा; क्या है राइट टू मैच और कैप्ड-अनकैप्ड का मतलब


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चेन्नई8 मिनट पहले

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इंडियन प्रीमियर लीग के 14वें सीजन के लिए 18 फरवरी को चेन्नई में नीलामी होगी। 292 खिलाड़ियों में से इस लीग के लिए अधिकतम 61 चुने जाएंगे। कोरोना की वजह से इस बार नीलामी थोड़ी देरी से शुरू हो रही है। पिछले सीजन के लिए ऑक्शन 19 दिसंबर 2019 को हुआ था। पिछले सीजन में 73 स्लॉट के लिए 332 खिलाड़ियों पर बोली लगी थी।

ऑक्शन की शुरुआत बल्लेबाजों से होगी। इसके बाद ऑलराउंडर्स और विकेटकीपर्स पर बोली लगेगी। नीलामी के दौरान सबकी नजर, किस खिलाड़ी पर सबसे ज्यादा बोली लगी, कौन सा खिलाड़ी, किस टीम में गया, किस फ्रेंचाइजी ने कितने खिलाड़ी खरीदे, इस पर रहती है। लेकिन इसके लिए जरूरी नियम क्या हैं, इस बारे में लोग कम ही जानते हैं। हम आपको नीलामी से जुड़े तमाम छोटे-बड़े नियम बता रहे हैं।

IPL नीलामी की प्रक्रिया क्या है?
IPL में 2 तरह की नीलामी होती है- मेगा और मिनी। दोनों ही तरह की नीलामी में फाइनल लिस्ट में शामिल खिलाड़ियों को कैप्ड, अनकैप्ड और ओवरसीज (विदेशी) के हिसाब से बांटा जाता है। साथ ही उन्हें बल्लेबाजों, गेंदबाजों, विकेटकीपर और ऑलराउंडर्स के अलग-अलग ग्रुप में रखा जाता है। लिस्ट के मुताबिक नीलामकर्ता खिलाड़ियों की बेस प्राइस पुकारेगा। फिर फ्रेंचाइजी पैडल उठाकर बोली लगाना शुरू करती हैं। यह उस सूरत में बढ़ जाती है, जब एक से ज्यादा टीम खिलाड़ी पर बोली लगाती हैं।

आखिर में जिस फ्रेंचाइजी ने सबसे बड़ी बोली लगाई होती है, खिलाड़ी उसका हो जाता है। ऐसा खिलाड़ी ‘सोल्ड’ कैटेगरी में चला जाता है और नीलामी खत्म हो जाती है। खिलाड़ी उस सूरत में नहीं बिकता है, जब किसी भी फ्रेंचाइजी ने उसके लिए बोली ना लगाई हो या नीलामकर्ता को प्रक्रिया में किसी तरह का गतिरोध लगता है।

मेगा ऑक्शन क्या है?
आखिरी मेगा ऑक्शन 2018 में हुआ था, क्योंकि चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स 2 साल का बैन झेलने के बाद लीग में वापस आई थीं। इस मेगा ऑक्शन में 182 स्लॉट के लिए 13 देशों के 578 खिलाड़ियों को चुनने के लिए 8 टीमों ने बोली लगाई थी। अगले साल 2 और टीमें IPL से जुड़ जाएंगी। ऐसे में अगला मेगा ऑक्शन 2022 में होगा।

  • मेगा ऑक्शन में फ्रेंचाइजी को अधिकतम 5 खिलाड़ियों को रिटेन करने की परमिशन होती है। बाकी सभी खिलाड़ी ऑक्शन में शामिल होते हैं। इन्हें कोई भी फ्रेंचाइजी नीलामी में खरीद सकती है। इसमें नए सिरे से टीमें बनती हैं।
  • 3 खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी शुरुआती राउंड में और 2 खिलाड़ियों को ऑक्शन के दौरान राइट टू मैच कार्ड से रिटेन कर सकती हैं।
  • फ्रेंचाइजी द्वारा रिटेन किए गए 3 खिलाड़ियों में 2 विदेशी प्लेयर भी हो सकते हैं।
  • इसके अलावा फ्रेंचाइजी राइट टू मैच कार्ड का इस्तेमाल कर भी पिछले स्क्वॉड में शामिल खिलाड़ियों को ला सकती हैं। सभी फ्रेंचाइजी के पास 2 राइट टू मैच कार्ड होते हैं।
  • अगर शुरुआती राउंड में 3 में से 2 रिटेन खिलाड़ी विदेशी होते हैं, तो फ्रेंचाइजी राइट टू मैच कार्ड से किसी भी विदेशी खिलाड़ी को स्क्वॉड में शामिल नहीं कर सकती हैं। अगर 3 में से 1 रिटेन खिलाड़ी विदेशी होता है, तो फ्रेंचाइजी राइट टू मैच कार्ड से 1 विदेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल कर सकती हैं।

मिनी ऑक्शन क्या है?
पिछले साल यानी 2020 में मिनी ऑक्शन हुआ था। जिसमें 73 स्लॉट पर 332 खिलाड़ियों को चुनने के लिए 8 टीमों ने बोली लगाई थी। इसमें से सिर्फ 29 विदेशी और भारत के 33 खिलाड़ियों समेत कुल 62 खिलाड़ी ही खरीदे गए थे। इस साल भी मिनी ऑक्शन ही होना है।

  • मिनी ऑक्शन में फ्रेंचाइजी को टीम में बचे गैप को फिल करने के लिए बोली लगानी होती है। इसमें फ्रेंचाइजी ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को रिटेन कर सकती हैं। रिलीज किए गए खिलाड़ी खुद को IPL गवर्निंग काउंसिल में फिर से रजिस्टर करवाते हैं। इसमें से शॉर्टलिस्ट किए गए खिलाड़ियों को अलग-अलग कीमत के स्लॉट में रखा जाता है।
  • फ्रेंचाइजी को एक तय समय के अंदर IPL गवर्निंग काउंसिल को अपने-अपने स्क्वॉड से रिटेन खिलाड़ियों की लिस्ट और निकाले गए खिलाड़ियों की लिस्ट देनी पड़ती है।
  • निकाले गए खिलाड़ियों की सैलरी कैप से आए रुपए और IPL द्वारा जोड़े गए पैसों को मिलाकर फ्रेंचाइजी नए खिलाड़ियों को खरीदती है।
  • फ्रेंचाइजी को स्क्वॉड की फुल स्ट्रेंथ (देशी-विदेशी प्लेयर) को ध्यान में रखते हुए प्लेयर्स खरीदने होते हैं।
  • इसके अलावा टीमों के पास ट्रांसफर विंडो (ट्रेड विंडो) का भी ऑप्शन होता है। इसके तहत खिलाड़ी दोनों टीमों की आपसी रजामंदी से फ्रेंचाइजी बदल सकते हैं। इसमें अनकैप्ड के साथ-साथ कैप्ड प्लेयर्स को भी टीमें ट्रेड कर सकती हैं।

एक टीम में मैक्सिमम और मिनिमम कितने खिलाड़ी होंगे?
सभी फ्रेंचाइजी अपनी टीम में मैक्सिमम 25 और मिनिमम 18 खिलाड़ी रख सकती हैं। किसी भी टीम में ज्यादा से ज्यादा 8 विदेशी खिलाड़ी हो सकते हैं। मौजूदा हालात में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास सबसे कम 14 खिलाड़ी और सनराइजर्स हैदराबाद के पास सबसे ज्यादा 22 खिलाड़ी हैं। यानी ऑक्शन में RCB को कम से कम 4 खिलाड़ी खरीदने होंगे। वहीं, SRH ज्यादा से ज्यादा 3 खिलाड़ी खरीद सकता है।

क्या अनसोल्ड खिलाड़ी बिकेंगे?
अनसोल्ड खिलाड़ी तभी बिकेंगे, जब फ्रेंचाइजी इन्हें दोबारा खरीदने की इच्छा जताएंगी। यह नीलामी के अंतिम चरण में होगा।

कैप्ड-अनकैप्ड प्लेयर का मतलब?
ऐसा खिलाड़ी जो टेस्ट, वनडे और टी-20 में से किसी एक में भी अपने देश के लिए खेला हो, वह कैप्ड श्रेणी में आता है। वहीं, अनकैप्ड का मतलब ऐसे प्लेयर से है, जो अपने देश के लिए तीनों में से किसी भी फॉर्मेट में न खेला हो। उदाहरण के तौर पर चेतेश्वर पुजारा ऑक्शन पूल में कैप्ड खिलाड़ी हैं, क्योंकि उन्होंने भारत के लिए मैच खेले हैं। वहीं, सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट 2021 में सबसे तेज शतक लगाने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन अनकैप्ड प्लेयर हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेला है।

खिलाड़ियों की बेस प्राइज कितनी और कैसे तय होती है?
पिछले सीजन में ही अनकैप्ड और कैप्ड खिलाड़ियों की बेस प्राइस में बदलाव किया गया था। अनकैप्ड खिलाड़ियों के लिए अब 20, 30 और 40 लाख की नई श्रेणी बनाई गई है। पहले यह 10, 20 और 30 लाख थी। नीलामी में कैप्ड खिलाड़ियों को 5 अलग-अलग बेस प्राइस में रखा गया है। इसमें 50 लाख, 75 लाख, 1 करोड़, 1.5 करोड़ और दो करोड़ है।

राइट टू मैच कार्ड (RTM कार्ड) क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे होता है?
राइट टू मैच कार्ड के जरिए फ्रेंचाइजी अपने पुराने खिलाड़ी को नीलामी में वापस हासिल कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें नीलामी में खिलाड़ी पर लगी सर्वाधिक बोली के बराबर की कीमत चुकानी होगी। उदाहरण के लिए राजस्थान रॉयल्स ने स्टीव स्मिथ को इस सीजन में रिटेन नहीं किया है। नीलामी के दौरान अगर किसी फ्रेंचाइजी ने उन पर सबसे बड़ी बोली लगाई तो राजस्थान RTM कार्ड का इस्तेमाल कर उन्हें अपनी टीम में ले सकती है। अधिकतम 5 खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी इसके जरिए (RTM कार्ड) रिटेन कर सकती हैं।

किसी फ्रेंचाइजी का पर्स क्या होता है, इस बार यह कितना है?
IPL के इस सीजन में फ्रेंचाइजी का सैलरी पर्स (बजट) पिछले सीजन की तरह 85 करोड़ ही है। यानी कोरोना की वजह से इस बार सैलरी बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जबकि 2019 में यह 80 करोड़ और 2018 में 66 करोड़ रुपए था। इस बार पंजाब के पास खिलाड़ियों को खरीदने के लिए सबसे ज्यादा 53.20 करोड़ रुपए हैं। नियमों के तहत टीम का न्यूनतम खर्च 60 करोड़ होना चाहिए यानी सैलरी कैप वैल्यू का 75%।

2021 ऑक्शन में कोरोना प्रोटोकॉल:

  • ऑक्शन से पहले दो बार कोरोना टेस्ट (RT-PCR) कराना होगा। पहला टेस्ट ऑक्शन से 72 घंटे पहले और दूसरा टेस्ट चेन्नई के ग्रैंड चोला होटल पहुंचने के बाद कराना है। दोनों ही टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव रहने के बाद ही मेंबर्स को वेन्यू में एंट्री दी जाएगी।
  • एक फ्रेंचाइजी से 13 मेंबर ऑक्शन में मौजूद रह सकेंगे। इनमें से 8 ऑक्शन टेबल पर और 5 मेंबर्स कौ गैलरी में बैठाया जाएगा।

IPL में मैच के दौरान के कुछ नियम

प्लेइंग-11 में कितने विदेशी खिलाड़ी होंगे?
प्लेइंग-11 में अधिकतम 4 विदेशी खिलाड़ी हो सकते हैं। कोई भी टीम मैच के किसी भी समय 4 से ज्यादा खिलाड़ियों को मैदान पर नहीं रख सकती। अगर कोई टीम प्लेइंग-11 में चार विदेशी खिलाड़ियों को रखती है, तो एक विदेशी खिलाड़ी दूसरे की जगह सिर्फ सब्स्टीट्यूट के तौर पर ही उतरेगा। अगर टीम प्लेइंग-11 में 4 से कम विदेशी खिलाड़ियों को शामिल करती है तो विदेशी खिलाड़ी मैच के दौरान सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के तौर पर उतर सकते हैं। इसका मतलब कभी भी मैच के दौरान एक टीम के 4 से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी मैदान में नहीं होंगे।

टाइम-आउट से संबंधित नियम क्या है?
मैच के दौरान टाइम-आउट 2.30 मिनट का होगा। एक पारी में दोनों टीमें सिर्फ एक बार इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। टाइम आउट के दौरान पूरी टीम स्ट्रैट्जी बनाने के लिए जुट सकती है। दो मिनट के बाद अंपायर और खिलाड़ी मैच को दोबारा समय से शुरू करने के लिए अपनी जगह पर चले जाएंगे। टाइम-आउट के दौरान ड्रिंक्स लाए जा सकते हैं। फील्डिंग टीम टाइम-आउट को छठे, सातवें, आठवें और नौवें ओवर के समाप्त होने के दौरान ले सकती हैं। वहीं, बल्लेबाजी करने वाली टीम 13 से 16वें ओवर के बीच टाइम-आउट का फायदा उठा सकती है।



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