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सीधी30 मिनट पहले
नातिन स्वाति और पोते राजकुमार को खो चुके गंभीर प्रजापति।
पांच हजार दे दिया, दो लाख दे देने की घोषणा कर दी जाती है, इससे क्या हमारे लोगों की जिंदगी लौट जाएगी। संकरे रास्ते की वजह से बस नहर में गिरी है। तीन-चार दिन से जाम लगा था, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। इसी वजह से मौतें हुई हैं।
यह आक्रोश बुजुर्ग गंभीर प्रजापति का था, जिन्होंने हादसे में अपनी नातिन और पोते को खो दिया है। गंभीर प्रजापति दूसरे दिन पोस्टमार्टम स्थल के पास बैठ अपनी नातिन स्वाति के शव का इंतजार कर रहे थे। खींचीपुर गांव निवासी स्वाति का शव सुबह 9 बजे मिल गया था, लेकिन पोस्टमार्टम के लिए 2 बजे तक शव नहीं लाया जा सका था।
गंभीर प्रजापति का गुस्सा उन्हीं के शब्दों में
‘च हजार देइला, दूई लाख देइला, का जीव हमारा न बचाई देई, हमारा जीव ना न बचाई देई। हेतनी-हेतनी सकरी सड़क बनवाई बनाई सारा पैसा ले जाई और धई बैंकन में। कही, इ दादा का कमाई है, बाबा का कमाई है। आज केतनी क्षति बा। इ क्षति काैऊ निगरानी कराईया न बा। हमारा नातिन है हमारा, बेटे और बिटियन से बढ़कर नातिन होइत है। परीक्षा देवे जा रही थी, एक देवे ने स्कूल लखनऊ में खोल देवही, मंत्री-मिनिस्टर के जई वहां लखनऊ, गरीबन का ना न। नातिन नर्सिंग की परीक्षा देवे जा रही थी, यही बनाई नहर में गाडी न गइल। चौड़ी सड़क बनी होत त नहर में न जाती। छुहिया घाटी में तीन से चार दिन तक जाम लगे रहे। 30 दिन में एक-दो दिन जाम खुला रहत है, बाकी दिन लगत रहत है।’
स्वाति अपने ममेरे भाई राजकुमार के साथ नर्सिंग की परीक्षा देने सतना जा रही थी। हादसे में राजकुमार की भी मौत हो गई थी। राजकुमार का शव मंगलवार को ही निकाल लिया गया था। जबकि स्वाति का शव बुधवार को मिला।
महीने में 25 दिन जाम
सीधी में नहर में बस गिरने से 51 लोगों की मौत की वजह खराब और संकरी सड़क है। इसको लेकर परिजन और स्थानीय लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां महीने में 25 दिन तो जाम ही लगा रहता है। प्रशासन को सबकुछ पता है, लेकिन इसके बाद भी समस्या के समाधान के पुख्ता उपाय नहीं किए जाते।
परीक्षा केंद्र क्यों नहीं खोला
ग्रामीणों ने कहा कि परीक्षा केंद्र सीधी में नहीं कर सकते थे क्या? परीक्षा केंद्र यहां होता तो सतना क्यों जाते? स्वाति की मां राजकलीदेवी है और पिता मनोज प्रजापति प्रधान आरक्षक हैं।