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सागरकुछ ही क्षण पहलेलेखक: राजकुमार प्रजापति
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- केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय के प्राेजेक्ट में मप्र के 11 जिलाें में सागर भी शामिल
सड़क हादसों की वजह जानने और उनमें कमी लाने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय मप्र समेत देश के 6 राज्याें में आईआरएडी (इंटिग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसमें मप्र के जिन 11 जिलाें काे शामिल किया गया, उनमें सागर भी शामिल है। जिले में साल 2020 में राेड एक्सीडेंट में 500 से ज्यादा माैतें हुई हैं।
यह आंकड़ा जिले में काेराेना से हुई 150 माैताें के मुकाबले करीब 3 गुना ज्यादा है। हादसे सबसे ज्यादा हाईवे पर हुए हैं। आईआरएडीप्राेजेक्ट के संबंध में अभी जिले के 4 थानाें की पुलिस काे ट्रेनिंग दी जा रही है। यह काम सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) काे साैंपा गया है। ट्रैफिक डीएसपी संजय खरे नाेडल अधिकारी बनाए गए हैं। प्रोजेक्ट में पुलिस, परिवहन, राजमार्ग एवं स्वस्थ विभाग से जुड़े अधिकारियाें काे शामिल किया गया है। भविष्य में 108 एम्बुलेंस, ब्लड बैंक जैसी सेवाओं काे भी इसमें लिंक किया जाएगा।
एक्सीडेंट का डेटा एक क्लिक पर कहीं भी देख सकेंगे
सड़क पर चल रहे वाहनाें की जानकारी वाहन एप और उससे जुड़ा रिकार्ड सारथी एप पर उपलब्ध रहता है। एक्सीडेंट हाेने पर माैके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी/ जांच कर्ता काे संबंधित वाहन का रजिस्ट्रेशन व चालक का लाइसेंस नंबर एप पर डालना हाेगा। जिससे वाहन से जुड़ी तमाम जानकारी मिल जाएगी। इसी एप में एक फार्मेट के जरिए पुलिस काे हादसे से जुड़ी जानकारी भरनी हाेगी। इसमें हादसे की वजह, मृतक व घायलाें के नाम व पता और घटना स्थल काे लेकर तमाम ब्याैरा देना हाेगा।
एप में जानकारी देते समय एक लिंक के जरिए नजदीकी अस्पताल के डाॅक्टर/अधिकारी, एंबुलेंस, आरटीओ व पुलिस अफसराें के पास हादसे की जानकारी तत्काल पहुंच जाएगी। जांच अधिकारी अपने मोबाइल से ही फोटो व 10-10 सेकंड के वीडियाे बनाकर उसे एप में लाेड करेंगे। इस एप के जरिए एक क्लिक पर कहीं भी हादसे का डेटा देखा जा सकेगा।
बंडा, देवरी, राहतगढ़ व गढ़ाकाेटा पुलिस ले रही ट्रेनिंग
एनआईसी के एक्सपर्ट द्वारा ई-गवर्नस के तहत पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को आईआरएडी प्राेजेक्ट के संबंध में ट्रेनिंग दी जा रही है। एनआईसी डीआईओ प्रशांत कराेले, एडीआईओ डेलन प्रजापति व ट्रेनर मुकुल मिश्रा एप के संबंध में तीन दिन से जिले के बंडा, देवरी,राहतगढ़ व गढ़ाकाेटा थाने के उप निरीक्षकाें काे डेटाबेस कलेक्शन से लेकर हादसे से जुड़े तमाम बिंदुओं काे एप पर अपलाेड करने के बारे में सिखा रहे हैं। एडीआईओ प्रजापति ने बताया कि आईआरएडी प्राेजेक्ट तीन प्लेटफार्म पर काम करता है। वेब, एंड्राइड और आईओएस। जिसे आईआईटी मद्रास और एनआईसी सागर के द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडू में इस प्राेजेक्ट पर काम चल रहा है। बाद में अन्य राज्याें में भी इस पर काम हाेगा। मुख्य उद्देश्य हादसाें पर कमी लाने के साथ घटना से जुड़ी जानकारी तत्काल उपलब्ध कराना है।
क्या थी हादसे की वजह एक्सपर्ट पता लगाएंगे
सड़क हादसे की समीक्षा के लिए मोबाइल एप पर कई विकल्प दिए गए है। जिसमें यह देखा जाएगा कि यह हादसा ओवरटेकिंग की वजह से हुआ या फिर चालक नशे में था। इतना ही नहीं वाहन की गति अधिक थी, या फिर धुंध या रोशनी कम होने की वजह से हादसा हुआ इसके अलावा अन्य कई विकल्प इसमें शामिल किए गए हैं। इन सभी विकल्पों की समीक्षा की जाएगी। जिससे हादसों की वजह जानकर उसमें कमीं लाई जा सके। पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह ने बताया कि प्रारंभिक ताैर पर जिले के 4 थानाें के अधिकारियाें काे एप की ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। इस प्राेजेक्ट के जरिए सड़क हादसाें काे राेकने की दिशा में उनके कारणाें काे जानने और कमियाें काे दूर करने का प्रयास रहेगा।