3 स्पोर्ट-यूटिलिटी वाहनों के लिए हुआ था अनुबंध- फोर्ड ने महिंद्रा के साथ तीन एसयूवी कार को विकसित करने के लिए अनुबंध किया था. जिसमें दोनों कंपनी के बीच आपूर्तिकर्ताओं, पॉवरट्रेन और प्रौद्योगिकी साझा किया जाना था. 275 मिलियन डॉलर के इस सौदें की वजह से फोर्ड का इंडिया में स्वतंत्र बिज़नेस पूरी तरह से लगभग बंद हो गया था. जिस वजह से फोर्ड ने ये कदम उठाया है.
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फोर्ड के CEO बदलने के बाद लिया फैसला- फोर्ड ने बीते अक्टूबर में फार्ले को नया सीईओ नियुक्त किया था. जिसके बाद से उन्होंने 11 बिलियन डॉलर की रकम से फोर्ड के बिजनेस को एक बार फिर बढ़ाने के लिए कई कड़े कदम उठाए थे. फोर्ड और महिंद्रा की बीच साझेदारी को खत्म होना भी फार्ले के फैसले के तौर पर देखा जा रहा है.
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फोर्ड की भारतीय कार बाजार में केवल 3 फीसदी की हिस्सेदारी- मारुति, हुंडई, टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों के सामने फोर्ड की भारतीय कार बाजार में मामूली हिस्सेदारी है. आपको बता दें फोर्ड ने 25 साल पहले भारतीय बाजार में दस्तक दी थी. लेकिन मारुति और हुंडई की सस्ती कारों से फोर्ड की कार मुकाबला नहीं कर सकती. ऐसे में फोर्ड की भारतीय बाजार में केवल 3 फीसदी की हिस्सेदारी है.