मौत के साथ भी निभा गए दोस्ती: सीधी हादसे में मरने वाले योगेंद्र और रमेश थे गहरे दोस्त, एक ही सीट पर साथ बैठे थे, लाश भी दोनों की एक किमी के अंतराल पर मिली

मौत के साथ भी निभा गए दोस्ती: सीधी हादसे में मरने वाले योगेंद्र और रमेश थे गहरे दोस्त, एक ही सीट पर साथ बैठे थे, लाश भी दोनों की एक किमी के अंतराल पर मिली


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सीधी44 मिनट पहले

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यारी ऐसी कि जिंदगी और मौत साथ-साथ।

  • हादसे में अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 53 हुआ, एक अब भी लापता
  • चार दिन से परिवार के लोगों ने अन्न का एक दाना तक नहीं खाया, रो-रो कर बुरा बेहाल

सीधी बस हादसे के जख्म इतने गहरे हैं कि शायद समय भी उन्हें न भर पाए। हादसे के चौथे दिन पहले रमेश का और फिर योगेंद्र का शव मिला। दोनों गहरे दोस्त थे। घटनास्थल से करीब 28 किमी दूर गोविंदगढ़ (रीवा) थाना क्षेत्र में एक किमी के अंतराल पर दोनों का शव मिला। दोनों की दोस्ती ऐसी थी कि अंतिम सफर पर भी साथ-साथ ही निकले। एक ही सीट पर सवार हुए, तो हादसे के बाद दोनों लापता भी साथ हुए और चौथे दिन मिले भी तो साथ-साथ।

रामपुर नैकिन में पीएम के दौरान परिजन।

रामपुर नैकिन में पीएम के दौरान परिजन।

पिपरौंध निवासी सुरेश कुमार राजस्व विभाग में लिपिक हैं। सुभाष नगर नूतन कॉलोनी में रहते हैं। नूतन कॉलोनी में ही पीडब्ल्यूडी में कार्यरत राजेंद्र विश्वकर्मा का भी परिवार रहता है। सुरेश का बड़ा बेटा योगेंद्र उर्फ विकास (28) और राजेंद्र का मझला बेटा रमेश में गहरी दोस्ती थी। योगेंद्र को जहां बैंक में जॉब मिल चुकी थी। वहीं, रमेश नौकरी की तलाश में था। दोनों जब भी फुर्सत मिलती, साथ-साथ निकल लेते थे। दोनों की मौत से परिवारजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।

सतना के लिए दोनों साथ निकले थे
रमेश को सतना से ट्रेन पकड़नी थी, तो योगेंद्र को भी बैंक के काम से सतना जाना था। दोनों सुबह 05 बजे एक साथ घर से निकले थे। बस में भी एक ही सीट पर बैठे थे। हादसे के के बाद दोनों लापता भी साथ हुए। दोनों की तलाश में परिवार वाले भी साथ-साथ भटक रहे थे। चौथे दिन पहले रमेश की छुहिया घाटी में बने टनल के दूसरी ओर टीकर के पास 500 मीटर दूरी पर सुबह 10 बजे शव मिला। फिर योगेंद्र शर्मा की टनल से डेढ़ किमी की दूरी पर दोपहर 12 बजे के लगभग शव मिला।

चार दिन से परिवार ने अन्न को हाथ नहीं लगाया
हादसे में दोनों जवान बेटों की मौत से परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। चार दिन से दोनों परिवारों में किसी ने अन्न को हाथ तक नहीं लगाया है। चार दिन का एक-एक पल परिवार पर भारी गुजरा। इंतजार था कि आखिरी बार बच्चों को देख लें। दोनों के शव मिलने की खबर पहुंची, तो परिवार कोहराम मच गया। रामपुर नैकिन में दोनों दोस्तों का साथ-साथ पीएम हुआ। आज ही शाम तक दोनों का अंतिम संस्कार भी सीधी में होगा।

योगेंद्र था शादी-शुदा
सुरेश कुमार के तीन संतानों में योगेंद्र उर्फ विवेक (28) सबसे बड़ा था। उसकी पांच साल पहले निशा से शादी हुई थी। अभी उनकी औलाद नहीं था। पति की मौत से निशा बदहवास सी हो गई। योगेंद्र से छोटा विपिन एयरफोर्स में है। हादसे की खबर पाकर वह भी घर आ गया है। वहीं, सबसे छोटा भाई विवेक शर्मा है, जो हादसे के बाद से ही पिता के साथ भाई की तलाश में जुटा था।



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