खरगोन की इस घटना ने पूरे मप्र को शर्मसार किया है.
खरगोन की घटना ने पूरे मप्र को शर्मसार किया है. यहां सरकारी अस्पताल के गार्ड ने महिला को घसीटकर बाहर किया. मामले के तूल पकड़ने के बाद सिविल सर्जन ने कई तरह के तर्क दिए. लेकिन घटना बेहद शर्मनाक है.
- News18Hindi
- Last Updated:
February 20, 2021, 5:02 PM IST
जानकारी के मुताबिक, घटना 18 फरवरी की है. अर्द्ध विक्षिप्त महिला घूमत-घूमते अचानक अस्पताल परिसर में आ गई. जब गार्ड ने उसे लावारिस घूमते देखा तो बाहर जाने को कहा. लेकिन, जब महिला ने इससे इनकार किया तो पुरूष गार्ड ने उसे हाथ से घसीटना शुरू किया और घसीटते हुए बाहर कर दिया.
अस्पताल प्रबंधन ने दिए ये तर्क
इधर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि महिला अर्द्ध विक्षिप्त थी. जहां वह खड़ी थी वहां से एंबुलेंस निकल रही थी. उसी एंबुलेंस से बचाने के लिए गार्ड ने महिला को हाथ पकड़ कर बाहर किया. अस्पताल के सिविल सर्जन दिव्येश वर्मा ने मीडिया को बताया कि अब गार्ड और डाक्टरों को हिदायत दी गई है की इस प्रकार की घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए. उन्होंने घटना को स्वीकारा किया. उनका कहना है कि गार्ड को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था. सिविल सर्जन के मुताबिक महिला विक्षिप्त है, वह कोविड सेंटर इलाके में पत्थर चला रही थी. नर्स व डयूटी डॉक्टर ने गार्ड से महिला को अस्पताल परिसर से बाहर करने के लिए कहा था. महिला जाने को तैयार नहीं थी.अस्पताल में नहीं कोई महिला गार्ड
बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी पुलिस को दे दी गई है. महिला मानसिक रोगी है, उसे इलाज के लिए इंदौर भेज दिया गया है. नियम के मुताबिक किसी महिला से डील करने के लिए अस्पताल में महिला गार्ड होनी चाहिए. यह बात सामने आई है कि जिला अस्पताल में कोई महिला गार्ड नहीं है. अगर महिला मानसिक रोगी है या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित है तो इसकी जानकारी बडे़ डॉक्टरों को देनी चाहिए थी.