भीष्म अष्टमी व्रत महिमा, संतान प्राप्ति, पितरों का कल्याण करा देगा ये काम, माघ मास की बेहद पुण्यदायक तिथि

भीष्म अष्टमी व्रत महिमा, संतान प्राप्ति, पितरों का कल्याण करा देगा ये काम, माघ मास की बेहद पुण्यदायक तिथि


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Bhishma Ashtami Vrat: हिंदू पंचांग के अनुसार, भीष्म पितामह के तर्पण की तिथि पर भीष्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं. तिथि को लेकर लोग असमंजस की स्थिति में हैं कि यह कब है. आइए जानतें हैं इस व्रत की तिथि व महिमा…

Bhishma Ashtami: माघ मास में आने वाली भीष्म अष्टमी का अत्यंत पावन महत्व है. यह पर्व हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस वर्ष भीष्म अष्टमी 26 जनवरी यानी कल मनाई जाएगी. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी तिथि को महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह ने उत्तरायण काल में अपने प्राणों का त्याग किया था.

इसी कारण यह दिन उनकी पुण्यतिथि के रूप में भी जाना जाता है. मान्यता है कि भीष्म अष्टमी का व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. आइए, उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि भीष्म अष्टमी का व्रत करने से कौन-कौन से पुण्य फल प्राप्त होते हैं और इसका धार्मिक महत्व क्या है?

कब मनाई जाएगी भीष्म अष्टमी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत कल यानी 25 जनवरी को रात 11 बजकर 10 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 26 जनवरी को रात 9 बजकर 11 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, इस साल भीष्म अष्टमी का व्रत 26 जनवरी 2026 को रखा जाएगा. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक रहने वाला है.

भीष्म अष्टमी का महत्व
धार्मिक शास्त्रों में भीष्म अष्टमी को भीष्म पितामह की तर्पण तिथि के रूप में विशेष महत्व दिया गया है. महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह ने आजीवन ब्रह्मचर्य का कठोर व्रत निभाया और उन्हें इच्छामृत्यु का दुर्लभ वरदान प्राप्त था. मान्यताओं के अनुसार उन्होंने माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को देह त्याग करने का संकल्प लिया, क्योंकि इसी समय सूर्य देव उत्तरायण की दिशा में अग्रसर होते हैं, जिसे अत्यंत शुभ काल माना जाता है.

संतान प्राप्ति, पितरों का कल्याण
हिंदू धर्म में विश्वास है कि जो श्रद्धालु भीष्म अष्टमी के दिन व्रत का पालन करता है, उसे संतान सुख की प्राप्ति होती है. इस पावन तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने से उन्हें मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है. साथ ही, जो भक्त भीष्म पितामह के नाम से जल अर्पित करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में पुण्य की वृद्धि होती है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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भीष्म अष्टमी व्रत महिमा, संतान प्राप्ति, पितरों का कल्याण करा देगा ये काम

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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