अचीवमेंट: फोर्ब्स इंडिया मैग्जीन में फीचर हुए प्रदेश के डॉ. आशीष मिश्रा

अचीवमेंट: फोर्ब्स इंडिया मैग्जीन में फीचर हुए प्रदेश के डॉ. आशीष मिश्रा


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भोपाल3 मिनट पहले

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फोर्ब्स इंडिया मैग्जीन में डॉ. आशीष मिश्रा

फोर्ब्स इंडिया मैग्जीन में प्रदेश के डॉ. आशीष मिश्रा ने जबलपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश का नाम रोशन किया है। दरअसल फॉर्ब्स इंडिया द्वारा मार्च 2021 के कवर पेज और कवर स्टोरी के लिए उम्लौट इंडिया आईटी कंसल्टिंग के सीईओ आीशष मिश्रा को चयनित किया गया है। बता दें कि डॉ. आशीष जबलपुर में जन्में और गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली गए और उसके बाद उन्होंने जर्मनी में काम करना शुरू किया। जर्मनी में एयरबस और अन्य कंपनियों के साथ काम करने के बाद एविएशन की बारीकियों को देश के युवाओं के साथ साझा करने के लिए पिछले 24 सालों से अपना काम कर रहे हैं। डॉ. आशीष के साथ हुई चर्चा के कुछ अंश

पहली जॉब कि दिल्ली में
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की थी। 1997 में उसके बाद 1997 में पहली जॉब दिल्ली में शुरू की थी, उसके बाद 2004 में जर्मनी चला गया और वहां 10 साल काम किया। 2013-14 में कंपनी को लीड कर रहा हूं। इस सेक्टर में मैं 24 सालों से काम कर रहा हूं। जब मैं जर्मनी में था तो हम एविऐशन से रिलेटेड काम में लगे रहे। उस समय यह कोशिश रहती थी कि हम वहां रहकर हिन्दुस्तान का नाम रोशन कर सकें। वहां की बड़ी कंपनियों में काम कर सकें।

जर्मनी के लोगों ने किया एप्रोच
वहां के लोगों ने देखा कि हम भी ऐसा ही काम हिंदुस्तान लाने वाले हैं तो हम लोगों को भी हिन्दुस्तान चलना चाहिए। तब उन्होंने 2012-13 में एप्रोच किया कि आप हिन्दुस्तान में भी इसी तरह का इंजीनियरिंग सेंटर शुरू करें। अलग-अलग एयरबस के प्रोग्राम में काम किया। जिससे की हम लोग सीखते चले गए और आज हम टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में डॉमिन में आए और हिन्दुस्तान सॉफ्टवेयर में आगे आ गए। हम लोग इंजीनियर कंपनी हैं, हमने सॉफ्टवेयर एलीमेंट्स को इंजीनियरिंग में मिश्रण करने का काम कांधों पर उठाया है।

कहीं भी रहें दिल में हमेशा हिंदुस्तान रहता है
जैसे-जैसे आप हिंदुस्तान के बाहर जाते हैं तो हिंदुस्तान दिल में रहता है। जर्मनी में इंजीनियरिंग वर्ल्ड क्लास मानी जाती है और हम लोगों को लगता था कि ये लोग कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं कर सकते। तब यही मन में प्रेरणा थी और उसी को करने का दृढ़संकल्प लेकर किया और वहां पर काफी सारे लोगें ने रिकगनाइज किया और बड़े-बड़े कांट्रेक्ट भी मिले। एयरबस के अलावा अन्य कंपनियों में काम किया और 10 साल बिताने के बाद वापस हिंदुस्तान आया तो एक अलग चैलेंज था, की एक जर्मन कंपनी को इंडिया में आकर स्थापित करना एक अलग चुनौती थी। हम लोगों का अचीवमेंट अभी तो जो आर्टिकल है, एयर टेक्नोलॉजी है, डॉमिन को वापस ला रहे हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज के लिए काम कर रहे हैं। जियो और वोडाफोन के साथ काम कर रहे हैं। कोशिश यह है कि हिंदुस्तान भी वर्ल्ड क्लास तक पहुंचे यह हमारा मुख्य फोकस है। हम लोगों का अचीवमेंट आर्टिकल, टेक् नॉलाजी में वापस लेकर आ रहे हैं। इंडियन डिफेंस के लिए काम कर रहेहैं। जियो या वोडाफोन के लिए काम करते हैं हिंदुस्तान की कंपनियां भी वर्ल्ड क्लास तक पहुंचे।

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