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भोपाल37 मिनट पहले
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लोककला विशेषज्ञ डॉ. कपिल तिवारी।
इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज (इंटेक) की पहल पर कथा उदयपुर का खास आयोजन जनजातीय संग्रहालय में हुआ। इतिहासकार डॉ. सुरेश मिश्र और लेखक विजय मनोहर तिवारी की एक घंटे की इस प्रस्तुति में एक ऐतिहासिक प्राचीन शहर की एक हजार साल पुरानी कहानी 45 फ्रेम में पेश की गई। इतिहास में यह एक जिज्ञासु और एक जानकार की दिलचस्प जुगलबंदी थी, जिससे सुनने के लिए भोपाल के अलावा विदिशा, सीहाेर और देवास के कलाप्रेमी भी आए। विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी हम अपने असल इतिहास से बेखबर हैं। हमें जानना चाहिए कि हम अगर इतिहास से पीछा छुड़ाते हैं तो इतिहास हमारा पीछा करता है। इंसानों की तरह इतिहास भी अपना सब्र तोड़ता है। उदयपुर आज धूल झाड़कर खड़ा हो रहा है। यहां सिर्फ एक मंदिर ही नहीं है, जिसके दर्शन के लिए लोग आते हैं। यहां लावारिस राजमहल हैं। बेशकीमती बावड़ियां हैं। दरवाजे हैं। अनगिनत खंडहर हैं। ये ऐसी विरासत है, जिनके बारे में लोग जानते तक नहीं है। लेकिन स्थानीय लोगों की जागरूकता से अब उदयपुर की तस्वीर तेजी से बदल रही है। दस फुट की दमघोंटू संकरी गली अब तीस फुट का चौड़ा रास्ता बन रही है। डॉ. मिश्र ने कहा कि इतिहास को जानने के लिए हमें इस तरह के हेरिटेज वॉक को हरेक स्थान पर करना होगा। इतिहास को बिल्कुल नए ढंग और गहराई से देखने की जरूरत है। उदयपुर इसकी केस स्टडी बन गया है, जहां हम सबको जरूर जाना चाहिए।
हैरिटेज वॉक कथा उदयपुर के दौरान लेखक विजय मनोहर तिवारी।
इंटेक के भोपाल चेप्टर के कन्वीनर डॉ. मदनमोहन उपाध्याय ने कहा कि भोपाल से ढाई घंटे की दूरी पर उदयपुर जैसे अल्पज्ञात प्राचीन नगर के वैभव पर पहली बार ध्यान गया है। उदयपुर अपना परिचय हमें दे रहा है। इस लावारिस विरासत को सहेजने की जरूरत है। एक हेरिटेज वॉक से निकले ये तथ्य चौंकाने वाले हैं। इंटेक की टीम अब वहां एक-एक स्मारक की स्टडी करेगी। इस मौके पर पद्श्री डॉ. कपिल तिवारी, विजयदत्त श्रीधर, लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक पांडे, साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे, प्रज्ञा भारती के दीपक शर्मा, पुरातत्वविद नारायण व्यास और पूजा सक्सेना समेत बड़ी तादाद में प्रबुद्धजन मौजूद थे।