MP की साइबर एक्सपर्ट DSP सृष्टि भार्गव: MPPSC में डिप्टी कलेक्टर की बजाय DSP की पोस्ट चुनी क्योंकि लीक से हटकर इन्वेस्टीगेशन जैसा चैलेंजिंग काम करना चाहती थी

MP की साइबर एक्सपर्ट DSP सृष्टि भार्गव: MPPSC में डिप्टी कलेक्टर की बजाय DSP की पोस्ट चुनी क्योंकि लीक से हटकर इन्वेस्टीगेशन जैसा चैलेंजिंग काम करना चाहती थी



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इंदौर27 मिनट पहलेलेखक: राजीव तिवारी

  • बड़े भाई का सपना पूरा करने के लिए आ गईं इंदौर
  • 6 साल तक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाने के साथ तैयारी भी की

30 साल की DSP सृष्टि भार्गव। इंदौर साइबर सेल में एकमात्र साइबर एक्सपर्ट। मूलत: रायसेन के बेगमगंज की रहने वाली सृष्टि साइबर से जुड़ी चुनौतियों से रोजाना रूबरू होती हैं। उनका कहना है, ‘मैं चाहती तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर बड़े पैकेज वाली नौकरी कर सकती थी या डिप्टी कलेक्टर बन सकती थी, लेकिन मेरे बड़े भाई ने कहा था कि हमेशा यूनिफॉर्म कोर्स ही करना, इसलिए DSP चुना। इंटरव्यू में मुझसे पूछा भी था, लेकिन मना कर दिया।’ इंजीनियरिंग से डीएसपी बनने तक का सफर उन्होंने भास्कर से शेयर किया।

रायसेन से स्कूली शिक्षा प्राप्त कर सृष्टि बड़े भाई का सपना पूरा करने के लिए इंदौर आ गईं। इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया। 2009 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गईं। 2008 में थर्ड ईयर में TCS कंपनी प्लेसमेंट के लिए कॉलेज आई, लेकिन सपना वर्दी पहनने का था। 6 साल तक निजी कॉलेज में पढ़ाया। बच्चों के स्मार्ट फोन चलाने को लेकर रिसर्च पेपर तैयार किया। इस दौरान सिविल सर्विसेज की तैयारी भी करती रहीं। दूसरे प्रयास में अच्छे नंबर आए। डिप्टी कलेक्टर की पोस्ट मिल सकती थी, लेकिन DSP बनीं।

Q. साइबर क्राइम में नई चुनौतियां क्या हैं?

सृष्टि कहती हैं, ‘हर बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन आने के बाद से सोसाइटी में बदलाव आया है। यह बदलाव कुछ हद तक तो पॉजिटिव है, लेकिन ड्रॉबैक भी हैं। कई लोगों को यह पता भी नहीं होता है, फोन में जो वे कर रहे हैं, वह अपराध की श्रेणी में आता है। साइबर एक्ट से लोग ज्यादा फैमिलियर नहीं हैं। साइबर क्राइम हाई लेवल पर है। इसे प्रचार-प्रसार के जरिए ही रोक सकते हैं।’

Q. घर और जॉब कैसे मैनेज करती हैं?

पुलिस की जॉब, चाहे साइबर में हों या प्रशासन में हों… यह जॉब 24 घंटे वाली है। साइबर एक अलग दुनिया है, जब हम साइबर में क्राइम में काम करना शुरू करते हैं, तो इंटरनेट पर चीजें खोजना शुरू करते हैं, सीडीआर एनालिसिस करते हैं, पते खोजते हैं। कभी-कभी डार्क वेब की दुनिया में चले जाते हैं। पुलिस मेरी खुद की चुनी हुई फील्ड है, इसलिए समय आड़े नहीं आता। मैं अधिक से अधिक समय ऑफिस में देने की कोशिश करती हूं।

Q. बड़ी चुनौती क्या रही, ऐसा केस जो चुनौती भरा रहा हो?

4 दिसंबर 2020 को इंदौर के नामी ज्वैलर का केस था जिनके साथ ठगी हुई थी। उनसे यह कहकर रुपए लिए गए थे कि मैं उक्त व्यापारी हूं और मुंबई से बात कर रहा हूं। पारिवारिक समस्या है, मदद करें। व्यापारी रुपए दे देते हैं। बाद में ठगी का पता चलता है। प्लानिंग कर 10 लोगों की टीम बनाई। सर्चिंग शुरू की, तो 10 आरोपी मिले। केस में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रातोंरात दिल्ली गई। आरोपी को पकड़कर इंदौर लाई। उसने अन्य के बारे में बताया। इस पर मुंबई गई। राजस्थान के छोटे-छोटे गांवों में गई। तीन दिनों तक वहां रुककर रेकी की। इसके बाद आरोपियों को पकड़ा। 30 दिन में मामले में रिजल्ट मिलना शुरू हो गया था।

Q. साइबर पुलिस, दूसरे थानों की पुलिस से अलग कैसे है?

आम थाने पर हर तरह के केस आते हैं। हम स्मार्टफोन से होने वाला क्राइम, जो संगीन अपराधों में से है, पोर्टल, लैपटॉप से होने वाला क्राइम, फाइनेंशियल फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी पर काम करते हैं। सामान्य थाने में अपराध होते ही वर्किंग शुरू हो जाती है, जबकि साइबर में हमारे पास पहले सबूत होते हैं। उसके बाद आरोपी तक पहुंचते हैं।

Q. महिला होने के नाते क्या मैसेज देना चाहती हैं?

सृष्टि कहती हैं, ‘महिलाओं और बच्चियों से कहना चाहूंगी, ऑनलाइन की दुनिया अलग है। इसकी ग्लैमर और सोशल लाइफ में सोच-समझकर दोस्ती करें। ट्रांजैक्शन नहीं करें। वेबकैम ओपन नहीं करें। यदि हो भी जाए, तो प्रॉपर बंद करें। सोशल मीडिया पर पर्सनल स्टेटस नहीं लगाएं। पर्सनल, प्राइवेट, फैमिली डिटेल शेयर नहीं करें। इसी का उपयोग अपराधी करते हैं। यदि गलती हो जाए, तो तत्काल साइबर सेल में शिकायत करें। हम हर पोर्टल से उस वीडियो या फोटो को डिलीट करने की ताकत रखते हैं। घबराएं नहीं और न ही ब्लैकमेल हों।’

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