सबसे ज्यादा पीएम करने वाली फॉरेंसिक एक्सपर्ट: पुरुषों का एकाधिकार तोड़ा; 32 साल में 9500 पोस्टमॉर्टम किए, एक बार 60 टुकड़े में आई डेड बॉडी का 2 दिन तक करती रहीं PM

सबसे ज्यादा पीएम करने वाली फॉरेंसिक एक्सपर्ट: पुरुषों का एकाधिकार तोड़ा; 32 साल में 9500 पोस्टमॉर्टम किए, एक बार 60 टुकड़े में आई डेड बॉडी का 2 दिन तक करती रहीं PM


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भोपाल6 मिनट पहलेलेखक: राजेश गाबा

मेडिको लीगल संस्थान भोपाल में सीनियर फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता।

  • मेडिको लीगल संस्थान में सीनियर फॉरेंसिक विशेषज्ञ हैं डॉ. गीतारानी
  • कहा- मेडिकल टीचिंग फील्ड में जाना चाहती थीं, इसका रहेगा दुख

आमतौर पर महिलाएं खून या डेड बॉडी देखकर जल्दी घबरा जाती हैं, लेकिन राजधानी में डॉ. गीतारानी गुप्ता ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने अब तक 9500 से ज्यादा शवों के पोस्टमॉर्टम किए हैं। 63 वर्षीय डॉ. गुप्ता 32 साल के करियर में नौ हजार से अधिक शवों का पोस्टमॉर्टम करने वाली एकमात्र महिला हैं।

फॉरेंसिक मेडिसिन में एमडी करने वाली डॉ. गीतारानी प्रदेश की पहली महिला भी हैं। उनमें आज भी वही जुनून और जज्बा कायम है। मेडिको लीगल संस्थान भोपाल में सीनियर फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता ने भास्कर के साथ अपने अनुभव शेयर किए –

वह बताती हैं, ‘करीब 8 साल पहले शाजापुर से 60 टुकड़ों में एक शव पोस्टमॉर्टम के लिए आया था। उस मामले में हत्या कर लाश सूखे बोरवेल में डाल दी गई थी। पुलिस को उस बॉडी को बोरवेल से निकालने में तीन दिन लग गए थे। उसका परीक्षण करने में मुझे दो दिन लगे थे। इसके बाद चार साल पहले तीन-चार टुकड़ों में खोपड़ी और कंकाल मिला। जिसका परीक्षण मुश्किल था, परिजन भी छुपा रहे थे। जब खोपड़ी का परीक्षण किया, तो पता चला कि खोपड़ी में गोली फंसी है। मामला सुलझा तो पता चला कि हत्या परिजनों ने ही की थी।’

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पीएचडी करना चाहती थी, पर नहीं कर पाई
डॉ. गीतारानी कहती हैं, ‘पिता शिक्षक थे। चाहते थे कि मैं मेडिकल टीचिंग फील्ड में जाऊं। इसलिए बीएससी, एमबीबीएस और एमडी (फॉरेंसिक मेडिसिन) किया। मैं भी मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर बनना चाहती थी। फॉरेंसिक डिपार्टमेंट में लेक्चररशिप की वैकेंसी निकली, तब डिमांडिंग डेट पर मेरी उम्र दो महीने 8 दिन ज्यादा निकली। इसका मुझे हमेशा दुख रहता है। इसके बाद पीएचडी भी करना चाहती थी, लेकिन सरकारी व्यवधान के कारण नहीं कर पाई। मैं फॉरेंसिक मेडिसिन विषय में एमडी करने वाली प्रदेश की प्रथम महिला डॉक्टर हूं। मैं देखती हूं, जब परिवार वाले मुंह पर कपड़ा बांधकर शव देखने आते हैं, तो अवाक रह जाती हूं कि मरने के बाद इंसान का मूल्य नहीं रह जाता।’

MPPSC से सिलेक्शन
‘मेरा जन्म मुरैना जिले में हुआ। सोचा था, मैं भी पिता की तरह शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ाऊंगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मेरा चयन 1989 में मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) से मप्र मेडिको लीगल संस्थान में मेडिकल ऑफिसर के पद पर हुआ। वर्तमान में मेरा मुख्य कार्य शव का पोस्टमॉर्टम करना और विशेषज्ञ मत देना है। इसके अलावा मेडिको लीगल प्रकरणों के निराकरण के लिए कोर्ट में भी उपस्थित रहना पड़ता है।’

पहली बार 20 डेड बॉडी देखकर पूरी नींद सोई
‘मैं जब एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा थी, तब एक दिन में एक साथ 20 डेड बॉडी आई। जिन्हें देखकर लगा कि आज तो मैं पूरी रात सो नहीं पाऊंगी, लेकिन मन में ठान लिया कि कुछ अलग करना है, तो मजबूत बनना होगा। इससे अंदरूनी हिम्मत मिली और रात में पूरी नींद सोई। इसके बाद, एक साल तक मैंने उन्हीं 20 बॉडी पर डिसेक्शन किया था।’

खाली समय में फोटोग्राफी करती हूं

वक्त मिलने पर डॉ. गीतारानी फोटोग्राफी करती हैं।

‘विभाग में शव परीक्षण के अतिरिक्त फोटोग्राफ आते हैं, तो उनकी जांच के लिए फोटोग्राफी सीखी। जाने-माने फोटोग्राफर राकेश जैमिनी और प्रशांत सक्सेना ने फोटोग्राफी सिखाई। मैं अकेली हूं, लेकिन पसंद के सभी काम करती हूं। अपने काम के अलावा लॉन्ग ड्राइविंग और फोटोग्राफी का भी शौक है। हर समय मेरे साथ कार, लैपटॉप, कैमरा होता है। कभी भी कैमरे में पशु-पक्षियों की फोटो लेने के लिए शहर के बाहर दूर निकल जाती हूं।’

आपको क्या बनना है, खुद तय करें
‘आज बेटियां हर क्षेत्र में मुकाम हासिल कर रही हैं। पुरुष वर्चस्व वाले समाज में महिलाएं स्थान बना रही हैं। बेटियों से यही कहना है कि साहसी बनें। चुनौती स्वीकार करें और आगे बढ़े। आपको करियर किस क्षेत्र में बनाना है, यह चुनाव खुद करें। अपने अंदर हमेशा जुनून जगा कर रखें।’

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