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- Team Of 20 People Searched Crocodiles In 14 Reservoirs For Five Days With Telescope, 215 Mills Among Them 71 Juveniles, 90 Youngsters
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सागर37 मिनट पहले
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नौरादेही में गणना के दौरान जलाशयों किनारे देखे गए मगरमच्छ।
- नौरादेही में पहली बार हुआ मगरमच्छों का सर्वे, नौरादेही, सिंगपुर व झापन रेंज में मिलें सबसे ज्यादा
- इनके अंडों की सुरक्षा के लिए तालाब व पोखरों के किनारे डाली जाएगी रेत
नौरादेही अभयारण्य में चल रहे मगरमच्छों के सर्वे की रिपोर्ट आ गई है। अभयारण्य के 14 जलाशयों में कुल 215 मगरमच्छ मिले हैं। इनमें से 71 किशोर व 90 युवा मगरमच्छ हैं। नौरादेही अभयारण्य बाघ-तेंदुओं के बाद मगरमच्छों से आबाद हो रहा है। सेंचुरी में पहली बार मगरमच्छों का सर्वे किया गया है। इनमें युवा और किशोरवय की संख्या अच्छी खासी है। इनकी तादाद और ज्यादा होने का अनुमान है। नौरादेही के जलाशयों में पांच दिन तक सर्वे चला। अलग-अलग आयु वर्ग के हिसाब से गणना की गई। नदी, नालों के अलावा यहां तालाब भी है।
वंशवृद्धि के लिए तालाब किनारे डलवाई जाएगी रेत
अभयारण्य के अधिकारियों ने बताया कि इन मगरमच्छों की वंशवृद्धि के लिए अब तालाब व जलाशयों के किनारे रेत डलवाई जा रही है। ताकि इनके अंडे सुरक्षित रह सकें। नौरादेही के 14 जलाशयों में 1 से 5 मार्च तक मगरमच्छों का सर्वे हुआ। दूरबीन के जरिए 20 लोगों की टीम ने अलग-अलग नदी, पोखरों में इनकी गिनती की। मगरमच्छों के जो आंकड़े आए हैं, वे इनकी वंशवृद्धि को लेकर अच्छे संकेत दे रहे हैं। 2 बाघ व 3 बाघिन के बसेरे के बाद यहां चीता प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है। इस तरह नौरादेही वाइल्ड लाइफ टूरिज्म की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
झापन रेंज में मिले सबसे ज्यादा 84 मगरमच्छ
नौरादेही अभयारण्य की झापन रेंज में गणना के दौरान सबसे अधिक मगरमच्छ पाए गए हैं। झापन के अलावा नौरादेही में 45, सिंगपुर में 45, मोहली में 27, सर्रा में 13 व डोंगरगांव में 1 मगमरमच्छ दिखा है। सर्वे के दौरान मिले 215 मगरमच्छों में 90 युवा और 71 किशोरवय दिखे हैं। इनसे कम आयु वाले मगरमच्छों की संख्या 7-8 रही है।
रेत में रहते हैं इनके अंडे सुरक्षित
सीसीएफ अमित दुबे ने कहा कि नौरादेही अभयारण्य के जलाशयों में मगरमच्छों की अच्छी तादाद सामने आई है। यह अपनी तरह का पहला सर्वे था। अनुमान है कि संख्या इससे कहीं ज्यादा होगी। यहां जल संरचनाओं में नदी, नाले और तालाब हैं। नदी-नालों में रेत रहती है, लेकिन तालाब किनारे रेत न होने की वजह से मगरमच्छों को वंशवृद्धि में दिक्कत आ रही है। ये अपने अंडे सुरक्षित रख सकें इसलिए तालाबों के आसपास रेत डलवा रहे हैं।