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इंदौर13 मिनट पहले
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फाइल फोटो
मेटरनिटी होम से बच्चा चोरी के मामले में उलझे एक दंपती का जमानत आवेदन जिला न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। जिला कोर्ट ने अपराध की गंभीरता का हवाला देकर आवेदन नकार दिया। मिली जानकारी के अनुसार आरोपियों प्रभुदयाल पिता शिवपालसिंह श्रीवास व उसकी पत्नी पुष्पा, दोनों देवास के रहने वाले है। STF ने 21 फरवरी को गिरफ्तार कर उन्हें 27 फरवरी को जेल भेज दिया था। सरकारी वकील ने अपराध की गंभीरता का हवाला दिया और मामले की जांच चलने की बात कही थी। इसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश केशवमणि सिंघल ने दोनों आरोपियों के जमानत आवेदन सिरे से नामंजूर कर दिए है।
इंदौर के यश अस्पताल से बच्चा चोरी के मामले में सात लोगों को STF ने गिरफ्तार किया था। इन्हीं सात में यह दंपती भी शामिल थे। STF इस मामले की जांच कर रही है। कुछ साल पहले संचालिका शकुंतला शुक्ला, उनके पति सचिन व बेटे की हादसे में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि उसके बाद क्लिनिक बंद हो गया। ऐसे कितने बच्चे चोरी हुए और किनके थे, अभी यह जांच का ही विषय है। लीलाबाई गिरोह की मुख्य आरोपी है। ये क्लिनिक में आया थी। किसी भी महिला का बच्चा इसे चुराना होता था तो ये जन्म के तत्काल बाद मां को बेहोशी की हालत में देख उसका बच्चा गायब कर देती थी। देवास में रहने वाली पुष्पाबाई उसकी बहन और प्रभुदयाल बहनोई है।
दो अलग-अलग जगह हुई थी कार्यवाही
पहला मामला
STF ने देवास के निगमकर्मी शिरीष इंदुरकर समेत उसकी पत्नी सुधा, पड़ोसी पुष्पा और दाई लीलाबाई को पकड़ा है। आरोप है शिरीष व सुधा ने पुष्पा और लीला बाई की मदद से अक्टूबर 2011 में यश अस्पताल की संचालिका डॉक्टर शर्मिला शुक्ला से एक दिन का बच्चा खरीदा था। अब यह बच्चा 10 साल का हो चुका है। वह निजी स्कूल में पढ़ता है। पुलिस ने जब लीला से पूछताछ की, तो उसने बताया कि वह मालिश और दाई का काम करती थी। डॉक्टर शर्मिला से उसकी पहचान थी। उसने डॉक्टर को शिरीष और सुधा के बारे में बताया और बच्चा दिलवा दिया। लीला ने रुपए लेने से भी इनकार कर दिया। अस्पताल संचालिका डॉ. शर्मिला से पूछताछ की जा रही है।
दूसरा मामला
ग्वालियर की मनीषा गाड़के का बच्चा 2013 में अगवा हुआ था। उसकी गुमशुदगी की शिकायत ग्वालियर के माधवगंज थाने में दर्ज की गई थी। हालांकि उस दौरान संबंधित एसडीएम व अन्य द्वारा उक्त प्रकरण में कार्रवाई नहीं की गई। बताया जाता है कि फरियादी को इस मामले को दबाने के लिए मोटी रकम दी गई थी। यह बच्चा इंदौर के एक निजी बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। बताया जाता ये बच्चा भी इसी गिरोह के माध्यम से किसी को बिकवाया गया था। अब पुलिस ये पता कर रही है कि ये बच्चा किसको बिकवाया था। साथ ही गिरोह में कौन-कौन शामिल हैं।