महाशिवरात्रि पर विशेष: उज्जैन के बाद धराड़ में दूसरा महाकाल मंदिर, गर्भगृह में पंचमुखी महादेव, ऊपर साधना स्थल व बीच में हैं महाकाल

महाशिवरात्रि पर विशेष: उज्जैन के बाद धराड़ में दूसरा महाकाल मंदिर, गर्भगृह में पंचमुखी महादेव, ऊपर साधना स्थल व बीच में हैं महाकाल


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रतलाम3 मिनट पहले

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धराड़ में स्थित महाकाल मंदिर जो बारहवीं सदी में बनाया गया, जो तीन मंजिला है।

  • महाशिवरात्रि पर 48 सालों से हो रहा है महारुद्र यज्ञ, जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंचने लगा है मंदिर

उज्जैन के महाकाल के बाद रतलाम से लगभग 11 किलोमीटर दूर धराड़ में दूसरा महाकाल मंदिर है। शताब्दियों पुराना मंदिर रख-रखाव की कमी के कारण जीर्ण-शीर्ण हो रहा है। तीन मंजिला मंदिर के गर्भगृह में पंचमुखी महादेव, इसके ऊपर महाकाल विराजित हैं।

इसके बाद व शिखर के नीचे साधना स्थल भी बना हुआ है। जिसमें प्राचीन समय में साधु-संत बैठ कर साधना किया करते थे। 12 वीं सदी में निर्मित मंदिर के पोल व मंदिर के आस-पास बनी आकृतियां देखने लायक हैं। इसे पहले फूटला मंदिर के नाम से जाना जाता था। शताब्दियों पुराना धराड़ के महाकाल मंदिर के शिखर के दर्शन सड़क मार्ग से होते हैं। यह मंदिर परमार शासकों के काल में 12वीं सदी में बनाया गया है। गर्भगृह में पंचमुखी शिवलिंग है। उसके ऊपर महाकाल विराजित हैं। यहां मां पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय, हनुमान भी विराजित हैं। ऊपर साधन स्थल बना हुआ।

महाकाल महाराज।

महाकाल महाराज।

विरुपाक्ष के समान भूल भुलैया मंदिर
महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर 48 सालों से महारुद्र यज्ञ हो रहा है। इस मर्तबा 49वां महारुद्र यज्ञ हो रहा है। मान्यता है कि पूर्णाहुति के दिन यहां नि:संतान महिलाएं खीर का प्रसाद ग्रहण करती हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। 2007 में महाकाल मंदिर यज्ञ समिति बनाई गई है। समित अध्यक्ष राजाराम पाटीदार ने बताया कि मंदिर में जो खंबे हैं उन्हें अभी तक कोई नहीं गिन पाया है। जब भी गिने जाते हैं तो तब उनकी गिनती अलग आती है। उन्होंने बताया वर्तमान समय में मंदिर की स्थिति जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है। जीर्णोद्धार की मांग है।

जीर्णोंद्धार नहीं होने पर अन्न त्यागा था संत सुंदरगिरी जी ने
इस मंदिर को पहले फूटला मंदिर के नाम से जानते थे। मंदिर तलाईनुमा था और लोग यहां हाथ-पैर धोने आते थे। शाम के समय कोई नहीं आता था। बड़े-बड़े पेड़ और झाड़ियां होने से लोग डरते थे। रमते हुए संत सुंदर गिरी जी महाराज 1950 में धराड़ पहुंचे। तब उन्होंने शिव मंदिर में जाने की इच्छा प्रकट की थी। जब वे मंदिर पहुंचे तो दुखी हुए और उन्होंने प्रण लिया था जब तक मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं होगा तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ।

दो साल में (1952) में जीर्णोद्धार हुआ था। संतश्री के गुरु आए थे तब उन्होंने मूंग की दाल के पाने से व्रत तुड़वाया। सेवानिवृत्त पटवारी चेनसिंह राठौर (81) ने बताया 5-7 सालों में एक बार संतश्री आते रहे थे। 1990 के लगभग वे आए तो उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। इस कारण उन्हें यहीं रोक लिया था और 1992 में उनका निधन हो गया था। मंदिर के पास ही उनकी समाधि बनाई गई। 1982 में पुरातत्व विभाग ने मंदिर का अधिग्रहण कर लिया।

मंदिर के गर्भगृह में विराजित पंचमुखी महादेव मंदिर।

मंदिर के गर्भगृह में विराजित पंचमुखी महादेव मंदिर।

रतलाम की बसावट ही धराड़ से हुई थी। सबसे पहले महाराजा रतनसिंह जी धराड़ आए थे। यहां का मंदिर सालों पुराना होकर चमत्कारी है। महादेव पाप नाशक हैं। महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष रूप से पंचमुखी महादेव मंदिर पर आराधना करने से सभी पापों का नाश होता है। मान्यता है कि उक्त मंदिर उड़कर आया था। यह प्रदेश का दूसरा महाकाल मंदिर है।
-पं. प्रकाश शर्मा, राजभट्‌ट

1200 साल से भी पुराना मंदिर है। इसका एस्टीमेट बनवाना है। शासन द्वारा मंजूरी मिलने पर काम शुरू कर दिया जाएगा। यह मंदिर ही नहीं रतलाम जिले व मंदसौर जिले के जो भी मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है उनका जीर्णोद्धार करना है। उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाद धराड़ का मंदिर है। यह प्रदेश का दूसरा महाकाल मंदिर है।
-अनिल जोशी, पुरातत्व विभाग अधिकारी

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