राजनीतिक पिच पर लंबी पारी खेलना चाहते हैं मनोज तिवारी, भाजपाई अशोक डिंडा से नहीं तोड़ेंगे दोस्ती

राजनीतिक पिच पर लंबी पारी खेलना चाहते हैं मनोज तिवारी, भाजपाई अशोक डिंडा से नहीं तोड़ेंगे दोस्ती


हावड़ा में जन्मे मनोज तिवारी ने भारतीय क्रिकेट टीम में साल 2008 में डेब्यू किया था. (PTI)

West Bengal Assembly Election: भाजपा पर निशाना साधते हुए मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी ने आम लोगों के लिए किये गये वादों को पूरा नहीं किया.

नई दिल्ली. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हुए मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) ने कहा कि वह राजनीति में एक लंबी पारी खेलना चाहते हैं. तिवारी ने कहा कि उनके क्रिकेट करियर की तरह ही हमेशा उनका इरादा बंगाल को जीत दिलाने का ही रहेगा. वर्षों तक अपने साथी क्रिकेटर अशोक डिंडा (Ashok Dinda) के साथ एक ही ‘ड्रेसिंग रूम’ साझा करने वाले तिवारी ने कहा कि डिंडा के भाजपा में शामिल होने के बावजूद उनकी दोस्ती बरकरार रहेगी. लेकिन साथ ही उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि वह राजनीतिक पिच पर तेज गेंदबाज की गेंदों पर हमेशा रन बनाना चाहेंगे.

भाजपा में शामिल हुए डिंडा के साथ अपने जुड़ाव पर तिवारी ने कहा कि क्योंकि डिंडा भाजपा में चले गये हैं तो इसका यह मतलब नहीं है कि वह अब उनके मित्र नहीं रहेंगे. तिवारी ने कहा, ‘‘हां, चुनाव खत्म होने तक हम दोस्त नहीं हो सकते. हम भी एक ही परिसर में रहते हैं, जब भी हमें मिलने का मौका मिलता है तो हम मिलते हैं, लेकिन हम राजनीति पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं.’’ डिंडा के भाजपा में शामिल होने के फैसले के बारे में पूछे जाने पर 35 वर्षीय तिवारी ने कहा, ‘‘यह डिंडा का फैसला है, मैंने सही निर्णय लिया है, और अपने फैसले पर डिंडा खुद जवाब दे सकते हैं. एक व्यक्ति के रूप में मैं उनकी भलाई की कामना करता हूं.’’

तिवारी ने चुटकी लेते हुए कहा कि वह हमेशा राजनीतिक पिच पर डिंडा की गेंदों को सीमा रेखा से पार पहुंचाते रहेंगे. राजनीति में उनके आने और चुनाव मैदान में उतरने पर बंगाल क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान ने कहा कि वह राजनीति में एक लंबी पारी खेलना चाहते है. तिवारी ने कहा, ‘‘मैं खुद को एक सेलिब्रिटी के रूप में कभी नहीं देखता, मैं कठिन रास्ते पर आया हूं और मैं खुद को लोगों के संघर्षों से जोड़कर रखना चाहता हूं.’’ क्रिकेट से राजनीति में आने का कारण पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुख्य कारण यह है कि वह राज्य के लोगों और अपने निर्वाचन क्षेत्र की सेवा करना चाहते हैं.

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उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे ममता दीदी का फोन आया और उन्होंने मुझे चुनाव लड़ने के लिए कहा. वर्ष 2019 (आम चुनाव) में भी उन्होंने मुझसे पूछा था, लेकिन उस समय यह नहीं हो सका था. लेकिन अब निर्णय लेना मेरे लिए आसान था क्योंकि मैं लोगों के लिए कुछ करना चाहता था और उनकी सेवा करना चाहता था.’’ भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी ने आम लोगों के लिए किये गये वादों को पूरा नहीं किया. उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव बंगाल की पहचान के लिए एक लड़ाई है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के आगामी विधानसभा चुनाव जीतने का विश्वास जताया.








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